बिहार में सियासी हलचल: 28 विधायकों को हाईकोर्ट का नोटिस

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट की कार्रवाई अब और गंभीर मोड़ लेती दिख रही है। चुनावी हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी देने के आरोपों पर अदालत ने 28 विधायकों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नामांकन के समय दी गई सूचनाओं की सच्चाई की जांच जरूरी है, क्योंकि मतदाता उम्मीदवार की पृष्ठभूमि के आधार पर ही अपना निर्णय लेते हैं।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों, संपत्ति और अन्य विवरणों को पूरी तरह सामने नहीं रखा। अदालत ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा है।

मुख्य आरोप

याचिकाओं में जिन बिंदुओं पर सवाल उठे हैं, उनमें शामिल हैं—

.  आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना

.  संपत्ति और आय का अधूरा ब्यौरा देना

.  मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत

.  मतगणना में अनियमितता की आशंका

इसके अलावा लगभग 10 अन्य विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले से जारी बताई जा रही है।

 

नई कानूनी पहलू भी सामने

मामले में कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी के लिए यह अनिवार्य है कि वह नामांकन पत्र और शपथपत्र में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी दे। उम्मीदवार को यह जानकारी अपनी राजनीतिक पार्टी को भी देनी होती है और हलफनामे में कोई कॉलम खाली नहीं छोड़ा जा सकता।

यदि कोई उम्मीदवार पूरी जानकारी नहीं देता, तो उसका नामांकन खारिज किया जा सकता है। चुनाव आयोग को भी इस संबंध में कार्रवाई का अधिकार है।

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सदस्यता पर खतरा

अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित विधायकों की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। ऐसे हालात बने तो कई सीटों पर उपचुनाव कराना पड़ सकता है।

 

आगे की प्रक्रिया

अब कोर्ट सभी दस्तावेजों और जवाबों की जांच करेगा। इसके बाद तय होगा कि हलफनामे में दी गई जानकारी सही थी या मतदाताओं को गुमराह किया गया। इस फैसले का असर राज्य की राजनीति पर बड़ा पड़ सकता है और कई जनप्रतिनिधियों का भविष्य इसी सुनवाई पर निर्भर करेगा।

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