नेताओं के पोस्टर टंगे ऊँचाई पर, सबलपुर की जनता डूबी गंगा की गहराई में

सबलपुर पंचायत की यह स्थिति सिर्फ़ एक पंचायत की कहानी नहीं है, बल्कि गंगा किनारे बसे सैकड़ों गांवों का दर्द है। चार दर्जन से अधिक घरों का गिरना और लगातार जारी कटाव यह साबित करता है कि चुनावी शोर-शराबे के बीच जनता की असली समस्याएँ कहीं खो जाती हैं।

न्यूज डेस्क पटना : बिहार में विधानसभा चुनावी माहौल गरमा रहा है। हर दल अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच एक तस्वीर ने सुर्खियाँ बटोरी – एक पुल पर एक साथ RJD, BJP और जन सुराज पार्टी के बैनर टंगे दिखे। लेकिन इन चुनावी नारों और प्रचार के बीच एक सच्चाई ऐसी भी है जो वोट की राजनीति से कहीं बड़ी है – गंगा की बाढ़ और मिट्टी कटाव से जूझती जनता।

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कटाव के कारण ढहा घर

सबलपुर पंचायत में सबसे ज़्यादा तबाही

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गंगा नदी के बढ़े जलस्तर और लगातार मिट्टी कटाव की वजह से सबलपुर पंचायत का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। अब तक करीब चार दर्जन से अधिक घर धराशायी हो चुके हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। खेत बर्बाद हो चुके हैं, सड़कें बह गई हैं और गांव का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है।

एक स्थानीय किसान का कहना है, “हर साल यही हाल होता है, लेकिन इस बार तो हालात और भी खराब हैं। घर गिर गए, जमीन नदी में समा गई, अब कहाँ जाएँ?”

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बांध निर्माण को लेकर प्रदर्शन करते ग्रामीण


जनता का दर्द और नेताओं के बैनर

बैनरों में बड़े-बड़े वादे लिखे हैं – रोज़गार, विकास और किसान कल्याण। लेकिन सबलपुर और आसपास के लोगों के लिए ये वादे खोखले लगते हैं। एक महिला ने रोते हुए कहा, “बच्चों को लेकर कहाँ जाएँ? घर टूट गया, खेत डूब गया, मदद करने वाला कोई नहीं आया।”

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परेशान ग्रामीण

साल दर साल वही समस्या

गंगा किनारे बसे इस इलाके में बाढ़ और कटाव नई समस्या नहीं है। हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ते ही मिट्टी कटाव शुरू हो जाता है और दर्जनों घर नदी में समा जाते हैं। राहत और पुनर्वास की बातें कागज़ों में होती हैं, लेकिन ज़मीन पर नज़र नहीं आतीं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते तटबंध और कटाव-रोधी प्रोजेक्ट पर काम किया जाए तो इस तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

इस तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने तंज कसा – “नेताओं के बैनर एक जगह लग सकते हैं, लेकिन जनता की समस्या हल करने में सब अलग-अलग हो जाते हैं।”
दूसरे यूज़र ने लिखा – “बैनर हर साल नए आते हैं, लेकिन बाढ़ और कटाव की समस्या हमेशा वही रहती है।”

Ayush Mishra

journalist

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