
तेहरान/
मध्यपूर्व में जारी तनाव और संघर्ष के बीच जहां एक तरफ बमबारी और असुरक्षा का माहौल है, वहीं दूसरी ओर इंसानी रिश्ते अब भी जिंदा हैं। तकनीक और जुगाड़ के सहारे लोग अपने अपनों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं—even अगर इसके लिए उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ें।
सिर्फ 5 मिनट की बात, लेकिन कीमत भारी
सीमा के पास रहने वाले कई लोग अपने परिवार से बात करने के लिए अनोखा तरीका अपना रहे हैं। एक फोन ईरान के नेटवर्क से जुड़ा होता है और दूसरा तुर्किये के नेटवर्क से। दोनों फोन को आपस में मिलाकर लोग कॉल कनेक्ट करते हैं। इस छोटे से “ब्रिज” के जरिए लोग अपने प्रियजनों की आवाज सुन पाते हैं।
हालांकि, यह सुविधा सस्ती नहीं है—सिर्फ 4-5 मिनट की बातचीत के लिए करीब 3000 रुपये तक खर्च करना पड़ता है।
ब्लैकआउट के बीच तकनीक बनी सहारा
युद्ध के चलते कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं और मोबाइल नेटवर्क ठप हो चुके हैं। ऐसे में लोग व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य ऐप्स के जरिए संपर्क करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर नेटवर्क और बार-बार कटने वाली कॉल बड़ी चुनौती बन जाती है।
कुछ जगहों पर लोग वीपीएन का इस्तेमाल करके ऐप्स चला रहे हैं, जबकि कई लोग सैटेलाइट फोन और वॉकी-टॉकी जैसे साधनों का सहारा ले रहे हैं।
ईरान और इजरायल में अलग हालात
ईरान में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, जहां हजारों स्टारलिंक टर्मिनल चोरी-छिपे पहुंचाए गए हैं ताकि लोग इंटरनेट से जुड़ सकें। इन टर्मिनल्स के जरिए लोग मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।
वहीं इजरायल में इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन सुरक्षा कारणों से कई बार सेवाएं बाधित हो जाती हैं। ऐसे में लोग मुख्य रूप से व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और सरकारी ऐप्स का सहारा लेते हैं।
जंग के बीच रिश्तों की तड़प
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली शैदी बताती हैं कि उनका परिवार एक संवेदनशील इलाके में रहता है, जहां अक्सर इंटरनेट बंद रहता है। वे रिश्तेदारों और पड़ोसियों के जरिए खबरें जुटाती हैं, ताकि जब भी कनेक्शन मिले, अपने परिवार तक जानकारी पहुंचा सकें।
वहीं यूरोप में रह रही जोहरा अपने भाई के जरिए संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। उनका भाई वीपीएन के जरिए किसी तरह ऐप चला पाता है, जिससे कभी-कभी बात हो जाती है।
लंदन में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वे अपने परिवार से सीधे बात नहीं कर पातीं—कभी-कभी सिर्फ अपनी बहन से संपर्क हो पाता है।
उम्मीद की डोर अभी बाकी है
तकनीकी मुश्किलों और महंगे साधनों के बावजूद, लोग हार नहीं मान रहे हैं। दो फोन के सहारे ही सही, लेकिन वे अपने रिश्तों को जिंदा रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
यह कहानी सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि इंसानी जज्बात और जुड़ाव की है—जो हर मुश्किल के बावजूद कायम है।






