नई दिल्ली:
इंफोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर फैली आशंकाओं पर अपनी राय रखते हुए कहा कि तकनीक इंसानों की जगह नहीं लेगी, बल्कि उनके काम को बेहतर और आसान बनाने में मदद करेगी। उनका मानना है कि एआई एक उपकरण की तरह है, जिसका सही उपयोग किया जाए तो यह मानव क्षमता को और मजबूत कर सकता है।
उन्होंने बताया कि इतिहास में हर नई तकनीक के आने पर नौकरी जाने की चिंता सामने आई है, लेकिन समय के साथ वही तकनीक नए अवसर भी लेकर आई। एआई भी इसी तरह नई तरह की नौकरियां और कौशल की मांग पैदा करेगा। इसलिए युवाओं को डरने की बजाय खुद को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना चाहिए।
मूर्ति ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है ताकि छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं बल्कि व्यावहारिक समझ और समस्या-समाधान की क्षमता भी मिले। अगर युवा लगातार सीखते रहें और अपनी स्किल्स को अपडेट करते रहें तो उनके लिए रोजगार के मौके कम नहीं होंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई इंसान की रचनात्मकता, सोचने-समझने की क्षमता और नैतिक निर्णय लेने की योग्यता की बराबरी नहीं कर सकता। मशीनें डेटा के आधार पर काम करती हैं, जबकि मनुष्य कल्पनाशीलता और अनुभव से फैसले लेते हैं — यही सबसे बड़ा अंतर है।
मूर्ति के अनुसार, तकनीक का उद्देश्य बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा करना नहीं बल्कि उत्पादकता बढ़ाना और जीवन को सुविधाजनक बनाना है। इसलिए समाज को चाहिए कि एआई को खतरे की तरह देखने के बजाय इसे सीखने और आगे बढ़ने के अवसर के रूप में अपनाए।

















