
गुजरात विद्यापीठ से मिलेंगी भारत रत्न और निशान-ए-पाकिस्तान की प्रतिकृतियाँ
देश के इतिहास से जुड़ी एक खास पहल सामने आई है। जल्द ही नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से जुड़े सर्वोच्च सम्मानों की झलक देखने को मिलेगी। गुजरात के अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ और पीएम म्यूज़ियम-लाइब्रेरी के बीच हुए सहयोग के तहत उनके प्रतिष्ठित अलंकरणों की प्रतिलिपियाँ (replicas) प्रदर्शित की जाएंगी।
क्या है पूरा मामला?
गुजरात विद्यापीठ, जहां मोरारजी देसाई लंबे समय तक जुड़े रहे और कुलाधिपति भी रहे, उनके निजी दस्तावेज़ों, पुरस्कारों और स्मृतिचिह्नों का संरक्षक है। देसाई ने अपने जीवनकाल में अपनी पुस्तकों, पत्रों और व्यक्तिगत वस्तुओं को इसी संस्थान को सौंप दिया था।
अब दोनों संस्थानों के बीच समझौते के बाद प्रधानमंत्री संग्रहालय में उनके जीवन और राजनीतिक योगदान को दर्शाने के लिए विशेष गैलरी तैयार की जा रही है, जिसमें उनके प्रमुख सम्मान भी प्रदर्शित होंगे — हालांकि मूल नहीं, बल्कि सुरक्षित प्रतिकृतियों के रूप में।
कौन-कौन से सम्मान दिखेंगे?
. सबसे अधिक आकर्षण दो ऐतिहासिक अलंकरणों का रहेगा:
. भारत रत्न – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
. निशान-ए-पाकिस्तान – पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
मोरारजी देसाई एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री रहे जिन्हें पाकिस्तान ने भी अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था। यह सम्मान उन्हें भारत-पाक रिश्तों में संवाद और शांति के प्रयासों के लिए दिया गया था।
संग्रहालय में क्या-क्या होगा खास?
प्रधानमंत्री संग्रहालय में सिर्फ पुरस्कार ही नहीं, बल्कि देसाई के जीवन से जुड़ी कई चीज़ें भी दिखाई जाएंगी, जैसे:
. निजी पत्र और दस्तावेज़
. किताबें और लेखन सामग्री
. चरखा और पारंपरिक वस्तुएँ
. उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े अभिलेख
इन वस्तुओं के जरिए आगंतुकों को उनके व्यक्तित्व, सादगीपूर्ण जीवनशैली और राजनीति में नैतिकता की झलक मिलेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
यह कदम सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का प्रयास है।
युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक राजनीति की समझ मिलेगी
भारत-पाक शांति प्रयासों के ऐतिहासिक संदर्भ को जाना जा सकेगा
राजनीतिक विरासत को सुरक्षित और डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा
मोरारजी देसाई भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने सादगी, अनुशासन और सिद्धांतों की राजनीति को महत्व दिया। प्रधानमंत्री संग्रहालय में उनके सम्मान और निजी धरोहरों की झलक आने वाली पीढ़ियों को न सिर्फ इतिहास बताएगी बल्कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की प्रेरणा भी देगी।
यह प्रदर्शनी इतिहास प्रेमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक खास आकर्षण बनने वाली है।






