पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मेघालय से एक बेहद प्रेरणादायक पहल सामने आई है। राज्य की प्रसिद्ध उमियम झील की सफाई के दौरान निकले कचरे को फेंकने के बजाय कलाकारों और स्टार्ट-अप टीम ने उसे रचनात्मक रूप दे दिया। उन्होंने पुराने और बेकार पड़े सामान का उपयोग कर एक बड़ा और आकर्षक नक्शा तैयार किया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
इस कलाकृति को बनाने के लिए लगभग 100 किलो कबाड़ इकट्ठा किया गया। इसमें सबसे ज्यादा पुराने जूते-चप्पल, प्लास्टिक और बेकार फैब्रिक का इस्तेमाल हुआ। इन सबको जोड़कर उत्तर-पूर्व भारत का आकार दिया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यह कला-कृति हाल ही में आयोजित एक सांस्कृतिक महोत्सव में भी प्रदर्शित की गई।
क्या है इस पहल की खास बात?
टीम का उद्देश्य केवल सजावट करना नहीं था, बल्कि लोगों को एक बड़ा संदेश देना था। झीलों और जंगलों में फेंका गया कचरा प्रकृति को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। इसी बात को समझाने के लिए बेकार वस्तुओं को उपयोगी रूप देकर दिखाया गया कि जिसे हम ‘कूड़ा’ समझते हैं, वही सही सोच के साथ संसाधन बन सकता है।
बताया गया कि भारत में हर कुछ मिनटों में बड़ी मात्रा में जूते-चप्पलों का कचरा निकलता है और इन्हें रिसायकल करना आसान नहीं होता। इसलिए इस सामग्री को कलात्मक और उपयोगी वस्तुओं में बदलना पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
सोच बदलना है असली लक्ष्य
इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का मानना है कि प्लास्टिक और अन्य कचरा केवल समस्या नहीं, बल्कि अवसर भी बन सकता है। अगर लोग थोड़ी जागरूकता दिखाएं तो यही बेकार चीजें घर की सजावट, फर्नीचर और कलाकृतियों में बदली जा सकती हैं। इस पहल का मुख्य मकसद समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है।
यह प्रयास हमें सिखाता है कि प्रकृति को बचाने के लिए बड़े कदमों के साथ-साथ छोटे-छोटे बदलाव भी बेहद अहम होते हैं।

















