पटना में जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) से हटाई गई दुकानों को लेकर अब नई योजना सामने आई है। शहर प्रशासन ने तय किया है कि इन दुकानों की जिम्मेदारी जीविका समूह को सौंपी जाएगी। इससे खास तौर पर स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा और आजीविका मजबूत होगी।
क्या है पूरा मामला?
जेपी गंगा पथ पर नदी का दृश्य साफ रखने और आवागमन सुचारु बनाने के लिए पहले करीब 200 अस्थायी दुकानों को हटाया गया था। हटाए जाने के बाद दुकानदारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। अब समाधान के तौर पर स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने इन दुकानों को नए तरीके से विकसित कर महिलाओं के समूहों को देने की तैयारी की है।
बताया जा रहा है कि इस संबंध में स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
महिलाओं को कैसे मिलेगा लाभ?
दुकानें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आवंटित होंगी
. समूह मिलकर संचालन और प्रबंधन करेगा
. स्थायी आय का साधन तैयार होगा
. शहरी क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा
इस योजना से न सिर्फ हटाए गए दुकानदारों की समस्या का समाधान होगा बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिलेगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी दुकानें
नई दुकानों को पहले से बेहतर डिजाइन में तैयार किया जा रहा है। इनमें मूलभूत सुविधाएँ पहले से उपलब्ध रहेंगी:
. बिजली कनेक्शन
. पंखे और लाइट
. व्यवस्थित काउंटर
. आकर्षक ढांचा
अधिकारियों ने दो अलग-अलग डिजाइन मॉडल तैयार किए हैं। इनमें से उपयुक्त मॉडल का चयन कर दुकानों को स्थापित किया जाएगा ताकि गंगा तट का सौंदर्य भी बना रहे और व्यापार भी सुचारु रूप से चल सके।
शहर के लिए क्यों खास है यह योजना?
यह पहल पटना के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है —
. गंगा तट की खूबसूरती बनी रहेगी
. छोटे व्यापारियों को व्यवस्थित स्थान मिलेगा
. महिलाओं को स्वरोज़गार मिलेगा
. पर्यटन स्थल पर सुविधाएँ बढ़ेंगी
कुल मिलाकर, जेपी गंगा पथ अब सिर्फ घूमने की जगह नहीं रहेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला आत्मनिर्भरता का भी केंद्र बन सकता है।

















