2100 तक भारत के जंगलों में कार्बन भंडारण में बड़ी छलांग संभव: नई रिसर्च

नई दिल्ली: The Hindu report 

एक ताज़ा वैज्ञानिक अध्ययन ने संकेत दिया है कि इस सदी के अंत तक भारत के जंगलों में कार्बन को संग्रहित करने की क्षमता लगभग दोगुनी हो सकती है। Environmental Research: Climate जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहते हैं, तो देश के वन भविष्य में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक मजबूत प्राकृतिक ढाल बन सकते हैं।

 

 क्या कहता है अध्ययन?

शोध में देश के अलग-अलग हिस्सों के वन क्षेत्र और उनके कार्बन अवशोषण की क्षमता का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते तापमान और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मात्रा में इजाफा पेड़ों की वृद्धि को तेज कर सकता है, जिससे वे अधिक कार्बन अपने भीतर समाहित कर पाएंगे।

हालांकि, यह तस्वीर पूरी तरह सीधी नहीं है। शोध बताता है कि बारिश के पैटर्न में बदलाव, मिट्टी की नमी और अन्य पर्यावरणीय कारक भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे।

 

अलग-अलग परिदृश्यों में अलग असर

अध्ययन में कम, मध्यम और अधिक उत्सर्जन वाले परिदृश्यों पर विचार किया गया।

मध्यम स्तर के उत्सर्जन की स्थिति में, वनों की कार्बन संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

उच्च उत्सर्जन के मामले में शुरुआत में वृद्धि तेज हो सकती है, लेकिन बाद में संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय दबाव इसे सीमित कर सकते हैं।

इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन का असर दोधारी तलवार की तरह है—कुछ फायदे, लेकिन साथ में गंभीर जोखिम भी।

 

बारिश और नमी की भूमिका

पेड़ों के विकास में वर्षा और मिट्टी की नमी अहम भूमिका निभाते हैं। अगर बारिश संतुलित रही, तो जंगल तेजी से बढ़ सकते हैं। लेकिन अनियमित मानसून या सूखे की स्थिति में यह बढ़ोतरी धीमी पड़ सकती है।

See also  संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देता है ‘नेशनल एंडेंजर्ड स्पीशीज़ डे 2026’

विशेषज्ञों का कहना है कि कई क्षेत्रों में पेड़ एक साल की भारी बारिश से तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे कार्बन जमा करते हैं।

 

किन क्षेत्रों में होगा सबसे ज्यादा असर?

रिसर्च के मुताबिक, सबसे अधिक बदलाव देश के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है, जैसे:

. राजस्थान

. गुजरात

. मध्य प्रदेश

इन इलाकों में वनस्पति की मात्रा बढ़ने की संभावना है, जिससे कार्बन स्टोरेज में बड़ी वृद्धि हो सकती है।

 

जोखिम भी कम नहीं

. हालांकि संभावनाएं सकारात्मक हैं, लेकिन खतरे भी मौजूद हैं।

. जंगलों में आग

. सूखा

. भूमि उपयोग में बदलाव (जैसे शहरीकरण या खेती का विस्तार)

ये सभी कारक वनों की इस क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर इन जोखिमों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो संभावित लाभ कम हो सकते हैं।

 

 विशेषज्ञों की राय

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन धीरे-धीरे हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और वन भी इससे अछूते नहीं हैं। यह बदलाव एक तरह से “खामोश पुनर्गठन” है, जिसमें प्रकृति खुद को नए हालात के अनुसार ढाल रही है।

 

आगे का रास्ता

इस अध्ययन से एक बात साफ है—अगर सही नीतियां अपनाई जाएं और वनों का संरक्षण किया जाए, तो भारत के जंगल भविष्य में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

भारत के जंगल आने वाले दशकों में जलवायु संकट से लड़ाई में मजबूत सहयोगी बन सकते हैं। लेकिन इसके लिए संतुलित विकास, संरक्षण और सतत नीतियों की जरूरत होगी, ताकि यह प्राकृतिक संपदा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

See also  गणेशोत्सव 2025: महाराष्ट्र से लेकर पूरे देश में बप्पा के जयकारे

 

Related Posts

59 दिनों का ज्येष्ठ माह: इस बार लंबे व्रत-त्योहारों का खास संयोग, श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व

पटना इस वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह असाधारण रूप से लंबा रहने वाला है। आम तौर पर एक महीने की अवधि करीब 29-30 दिनों की होती है, लेकिन…

Read more

छोटे सिलेंडर की कीमत में उछाल, गैस मजदूरों और आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

पटना रसोई गैस से जुड़ी लागत में एक बार फिर बढ़ोतरी ने आम लोगों और छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर छोटे सिलेंडर की कीमतों में हुई तेज…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

नीदरलैंड्स में अमृता शेरगिल की कला का ऐतिहासिक प्रदर्शन, भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

नीदरलैंड्स में अमृता शेरगिल की कला का ऐतिहासिक प्रदर्शन, भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती, वैश्विक विकास के लिए साथ मिलकर करेंगे काम

भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती, वैश्विक विकास के लिए साथ मिलकर करेंगे काम

भारत के गैर-पेट्रोलियम निर्यात में शानदार बढ़ोतरी, अप्रैल 2026 में 9% से अधिक की वृद्धि

भारत के गैर-पेट्रोलियम निर्यात में शानदार बढ़ोतरी, अप्रैल 2026 में 9% से अधिक की वृद्धि

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की मजबूत आवाज, जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर दिया बड़ा संदेश

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की मजबूत आवाज, जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर दिया बड़ा संदेश

पीएम मोदी का पांच देशों का दौरा आज से शुरू, वैश्विक साझेदारी को मिलेगी नई दिशा

पीएम मोदी का पांच देशों का दौरा आज से शुरू, वैश्विक साझेदारी को मिलेगी नई दिशा

संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देता है ‘नेशनल एंडेंजर्ड स्पीशीज़ डे 2026’

संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देता है ‘नेशनल एंडेंजर्ड स्पीशीज़ डे 2026’