
नई दिल्ली
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कमी नहीं होने दी जाएगी। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है और देश में गैस, पेट्रोल तथा डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण तेल और गैस के दामों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन भारत ने समय रहते कई रणनीतिक फैसले लिए हैं। इन फैसलों के कारण देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी।
ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की योजना
सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर भी ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार एलपीजी उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई गई है। इससे घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति और अधिक मजबूत होगी।
सरकार का मानना है कि बढ़ते उत्पादन और बेहतर वितरण व्यवस्था के कारण आने वाले समय में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पहले से बेहतर हो सकती है।
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कदम
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने भंडार से लगभग 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को संतुलित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा और आयात करने वाले देशों को राहत मिल सकती है।
सरकार के प्रमुख कदम
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कई उपाय लागू किए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
. केरोसिन आवंटन में वृद्धि की गई है।
. होटल और रेस्टोरेंट को वैकल्पिक ईंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा आयात के नए स्रोत तलाशे गए हैं।
. देश की रिफाइनरियों को पूरी क्षमता से संचालित किया जा रहा है।
. ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
. इन उपायों के जरिए सरकार का लक्ष्य ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना है।
प्रधानमंत्री का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों को ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जाएगा।
भविष्य की रणनीति
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में ऊर्जा के विविध स्रोतों पर ध्यान देगा। इसमें पारंपरिक ईंधन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्प भी शामिल हैं।
सरकार की रणनीति यही है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो और आम लोगों को ईंधन की कमी या अत्यधिक कीमतों का सामना न करना पड़े।





