न्यूज़ डेस्क पटना : बोधगया के बाढ़ प्रभावित इलाके अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। बाढ़ का पानी कम हुआ है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। पानी घटने के साथ ही गांवों में तबाही के मंजर सामने आ रहे हैं। खेतों में लगी फसल सड़ चुकी है, और बाढ़ का गंदा पानी अब गांव में दुर्गंध फैला रहा है।
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता बीमारियों के फैलने को लेकर है, हालांकि अभी तक किसी प्रकार की बीमारी की सूचना नहीं मिली है।
बाढ़ के कारण कई बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। बिजली के पोल और तार टूट गए हैं, और पूर्वी क्षेत्र की अधिकतर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
सबसे अधिक नुकसान बतसपुर, छाछ, गंगा बीघा, मोराटाल, बसाढ़ी, सीलौंजा और अजा टोला घुंघरिया में हुआ है। सड़कें टूटी हुई हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों ने इन जगहों पर बांस और कपड़े लगाकर बैरिकेडिंग की है, ताकि कोई हादसा न हो।
बतसपुर की मुख्य सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण लगभग दो दर्जन गांव के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं गंगा बीघा के लोग अब तक कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं खोज पाए हैं।
बाढ़ के कारण लगभग 20 मकान गिर गए हैं और घरों में रखा राशन, कपड़े और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी नष्ट हो गए हैं। कुछ लोगों के मवेशी और बकरियां भी मर गईं।
ग्रामीण अब भी बेबस हैं और दैनिक जरूरत की वस्तुएं खरीदने शहर नहीं जा पा रहे हैं। किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
प्रशासन ने किया सर्वे और मरम्मत की योजना शुरू
बोधगया प्रखंड के अंचलाधिकारी महेश कुमार ने बताया कि बाढ़ का पानी पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। घुंघरिया में स्कूलों में रह रहे लोग अब अपने घर लौट चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क टूटने वाले इलाकों का सर्वे आरसीडी विभाग द्वारा किया जा रहा है और जल्द ही सभी सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सामूहिक रसोई भी चल रही थी, लेकिन अब अधिकांश लोग अपने घरों में लौट गए हैं।
सदर एसडीओ किसलय श्रीवास्तव ने बताया कि नए डैम निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है और बरसात के बाद काम शुरू किया जाएगा।
बोधगया के ग्रामीण अब राहत की उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन उनके सामने अभी भी रोजमर्रा की मुश्किलें और नुकसान की भरपाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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