पटना: बिहार से राज्यसभा की खाली होने वाली सीटों को लेकर चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। राज्य की कुल 5 सीटों सहित देशभर की 37 सीटों पर मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा। निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन की शुरुआत 26 फरवरी से होगी और तय तारीखों के अनुसार पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक 26 फरवरी से 5 मार्च तक उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 9 मार्च रखी गई है। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
कितने वोटों की जरूरत
राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि विधायक मतदान करते हैं। बिहार विधानसभा के कुल 243 सदस्यों के आधार पर एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। सीटों की संख्या और विधायकों के गणित के कारण इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है।
राजनीतिक समीकरण
विधानसभा में बहुमत के आंकड़ों को देखते हुए सत्ताधारी गठबंधन को अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि एक सीट पर कड़ी टक्कर की स्थिति बन सकती है। राजनीतिक दलों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं और निर्दलीय या छोटे दलों के विधायक भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
एक सीट पर मुकाबला ज्यादा रोमांचक
खासकर पांचवीं सीट पर जीत-हार का अंतर बहुत कम वोटों से तय हो सकता है। इसलिए सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और अतिरिक्त समर्थन हासिल करने की रणनीति बना रहे हैं। इस सीट को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति और बैठकों का दौर तेज होने की उम्मीद है।

















