
बिहार को जल्द ही नया राज्यपाल मिलने जा रहा है। जानकारी के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन 14 मार्च को राज्य के नए राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। वे राज्य के 43वें राज्यपाल होंगे और वर्तमान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लेंगे।
राजधानी पटना के राजभवन परिसर में आयोजित एक औपचारिक समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। यह शपथ पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू द्वारा दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, कई जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे।
पटना पहुंचने का कार्यक्रम
सूत्रों के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन 12 मार्च (गुरुवार) को पटना पहुंचेंगे। वे दोपहर के समय हवाई मार्ग से पटना एयरपोर्ट पर उतरेंगे और वहां से सीधे राजभवन जाएंगे। इसके बाद 14 मार्च को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में वे औपचारिक रूप से राज्यपाल का पद संभालेंगे।
अनुभवी सैन्य अधिकारी रहे हैं हसनैन
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने सैन्य करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
वे श्रीनगर स्थित चिनार कोर (15 कोर) के कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा से जुड़े कई अहम अभियानों का नेतृत्व किया। उनकी रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना में विशेष सम्मान प्राप्त है।
शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव
सैन्य सेवाओं के अलावा हसनैन का शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में कई पहल की थीं।
आतंकवाद विरोधी अभियानों में निभाई भूमिका
अपने सैन्य जीवन के दौरान सैयद अता हसनैन कई महत्वपूर्ण अभियानों का हिस्सा रहे। वर्ष 1988-90 के दौरान श्रीलंका में चलाए गए ‘ऑपरेशन पवन’ में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा 1990-91 में पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में भी वे शामिल रहे। इन अभियानों में उनकी रणनीति और नेतृत्व की सराहना की गई थी।
बिहार के लिए नई उम्मीदें
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सैयद अता हसनैन का व्यापक अनुभव बिहार के प्रशासनिक और संवैधानिक कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल ऐसे समय शुरू हो रहा है जब बिहार विकास और प्रशासनिक सुधारों के कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजर रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से राज्य को नई दिशा मिल सकती है।
14 मार्च को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह बिहार की राजनीति और प्रशासन के लिए एक अहम अवसर माना जा रहा है, जब राज्य को आधिकारिक रूप से अपना नया संवैधानिक प्रमुख मिल जाएगा।





