वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

नई दिल्ली

भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़ा न केवल पहले के अनुमानों से बेहतर है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।

सरकार द्वारा जारी नवीनतम आर्थिक आकलनों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही में वृद्धि दर के बढ़कर 7.7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास की गति लगातार बनी हुई है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस सकारात्मक प्रदर्शन के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर बड़े पैमाने पर निवेश, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली नीतियां, बढ़ती घरेलू मांग तथा सेवा क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक नेटवर्क और शहरी विकास परियोजनाओं में हो रहे निवेश का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। इन परियोजनाओं ने रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ निर्माण सामग्री, परिवहन और अन्य संबंधित उद्योगों की मांग में भी वृद्धि की है।

विनिर्माण क्षेत्र भी देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। “मेक इन इंडिया” जैसी पहलों और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के कारण घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में बढ़ोतरी ने औद्योगिक विकास को नई गति दी है।

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सेवा क्षेत्र, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, आतिथ्य, खुदरा व्यापार और पेशेवर सेवाओं में मांग बढ़ने से इस क्षेत्र का योगदान और मजबूत हुआ है। डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने भी आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान की है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। कृषि क्षेत्र ने मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया है। बेहतर कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य आर्थिक संस्थानों ने भी देश की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। हालांकि वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और स्थिर वित्तीय नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही हैं।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती देश के करोड़ों नागरिकों, श्रमिकों, किसानों, उद्यमियों और उद्योग जगत के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले कुछ वर्षों में लागू किए गए सुधारों का लाभ देश को लगातार मिल रहा है और भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का भी मानना है कि निर्माण, व्यापार, परिवहन, भंडारण, संचार, वित्तीय सेवाओं और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निरंतर विस्तार आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि को और गति देगा। इन क्षेत्रों में बढ़ता निवेश रोजगार सृजन के साथ-साथ आय और खपत को भी बढ़ावा देगा।

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विश्लेषकों के अनुसार, 7.7 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर यह दर्शाती है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है और देश दीर्घकालिक विकास के लिए तैयार है। बढ़ती शहरीकरण प्रक्रिया, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, युवाओं की बड़ी आबादी और निवेश के अनुकूल वातावरण भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का प्रदर्शन यह साबित करता है कि देश के पास विकास को बनाए रखने की पर्याप्त क्षमता है। यदि वर्तमान नीतियों और विकास कार्यक्रमों को इसी तरह आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख विकास इंजन बन सकता है।

 

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत GDP वृद्धि का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती, सरकार की विकासोन्मुख नीतियों, बढ़ते निवेश, मजबूत सेवा क्षेत्र और औद्योगिक विस्तार का स्पष्ट संकेत है। यह आंकड़ा न केवल आर्थिक प्रगति का प्रतीक है, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती आर्थिक शक्ति को भी दर्शाता है।

Reference The Hindu

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