भीषण गर्मी से भारत के दुग्ध उत्पादन पर संकट

बढ़ते तापमान ने डेयरी किसानों की चिंता बढ़ाई, दूध देने वाले पशुओं की सेहत और उत्पादन दोनों प्रभावित

नई दिल्ली:

देश में लगातार बढ़ती गर्मी अब केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुओं और डेयरी उद्योग के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इस साल उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण गाय और भैंसों की खाने की क्षमता कम हो रही है, उनकी ऊर्जा तेजी से घट रही है और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

दिल्ली के पास एक छोटे डेयरी फार्म में काम करने वाले किसान भरद्वाज ने हाल ही में एक कमजोर और समय से पहले जन्मे बछड़े को देखकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि नवजात बछड़ा बेहद छोटा और कमजोर था तथा उसके शरीर पर बाल भी बहुत कम थे। किसान को डर था कि शायद वह ज्यादा समय तक जीवित न रह पाए। ऐसे मामले अब धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं और वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन तथा लगातार बढ़ती गर्मी से जोड़कर देख रहे हैं।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश माना जाता है। वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग एक चौथाई हिस्सा भारत से आता है। देश में करोड़ों किसान अपनी आजीविका के लिए डेयरी पर निर्भर हैं। अनुमान है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में डेयरी क्षेत्र का लगभग 5 प्रतिशत योगदान है और इससे 8 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार एवं आय प्राप्त होती है।

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हालांकि दूध उत्पादन के मामले में भारत ने हाल के वर्षों में रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में देश का दूध उत्पादन लगभग 239 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 4 प्रतिशत अधिक है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में यह उपलब्धि खतरे में पड़ सकती है।

 

गर्मी से घट रही पशुओं की क्षमता

पशु चिकित्सकों के अनुसार जब तापमान बहुत अधिक हो जाता है, तब गाय और भैंस सामान्य मात्रा में चारा नहीं खा पाते। भोजन कम लेने के कारण उनके शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है और दूध उत्पादन स्वतः घट जाता है। कई पशु गर्मी से बचने के लिए अधिक पानी पीते हैं और लंबे समय तक सुस्त बने रहते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि भीषण गर्मी का असर केवल दूध की मात्रा तक सीमित नहीं है। इससे पशुओं की प्रजनन क्षमता भी कम हो रही है। कई मामलों में गर्भधारण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और समय से पहले जन्म लेने वाले कमजोर बछड़ों की संख्या बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे समय तक हीट स्ट्रेस रहने से पशुओं के शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

 

छोटे किसानों पर सबसे ज्यादा असर

भारत में अधिकांश डेयरी उत्पादन छोटे किसानों द्वारा किया जाता है, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं। कई परिवारों के पास केवल चार से छह पशु होते हैं और वही उनकी मुख्य आय का स्रोत बनते हैं। ऐसे किसानों के लिए गर्मी से होने वाला नुकसान सीधे आर्थिक संकट में बदल जाता है।

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दिल्ली के आसपास डेयरी चलाने वाले कई किसानों ने बताया कि इस बार पशु पहले की तुलना में कम दूध दे रहे हैं। पशुओं को ठंडा रखने के लिए अतिरिक्त पानी, पंखों और शेड की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिससे खर्च बढ़ गया है। लेकिन छोटे किसानों के लिए आधुनिक कूलिंग सिस्टम लगाना आसान नहीं है क्योंकि इसके लिए काफी पूंजी की जरूरत होती है।

 

बदलते मौसम के साथ बदलती चुनौतियां

जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में गर्मियों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। आने वाले दशकों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे डेयरी उद्योग पर दबाव और अधिक होगा। सरकार और वैज्ञानिक संस्थान अब ऐसे उपायों पर काम कर रहे हैं जिनसे पशुओं को गर्मी से बचाया जा सके।

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार पशुओं के लिए बेहतर वेंटिलेशन, ठंडे पानी की उपलब्धता, छायादार शेड और संतुलित आहार जैसी सुविधाएं बेहद जरूरी हो गई हैं। कुछ बड़े डेयरी संचालकों ने पशुओं के शेड में पंखे, स्प्रिंकलर और विशेष कूलिंग सिस्टम लगाने शुरू किए हैं ताकि तापमान का असर कम किया जा सके।

 

भविष्य के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते डेयरी क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप तैयार नहीं किया गया, तो दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इसका असर केवल किसानों की आय पर ही नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

भारत की बड़ी आबादी दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर है। ऐसे में बढ़ती गर्मी केवल मौसम का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चेतावनी बन चुकी है। किसानों का कहना है कि उन्हें तकनीकी सहायता, बेहतर सुविधाएं और सरकारी सहयोग की जरूरत है ताकि वे बदलते मौसम की इस चुनौती का सामना कर सकें।

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Reference The Hindu

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