
नई दिल्ली: भारत में आर्थिक असमानता को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है। आंकड़े बताते हैं कि देश में अमीर और गरीब के बीच की दूरी लगातार बढ़ रही है, जिससे सामाजिक और आर्थिक संतुलन पर असर पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के सबसे अमीर 5% परिवारों की संपत्ति में पिछले कुछ वर्षों में करीब 400% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, निचले तबके की आय और संपत्ति में उतनी तेजी से सुधार नहीं हो पाया है।
गरीबों की स्थिति में सीमित सुधार
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश में लगभग 77 गरीब अब अरबपति वर्ग में शामिल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी आबादी अब भी आर्थिक रूप से कमजोर बनी हुई है।
वर्ष 2019 से 2025 के बीच किए गए अध्ययन में पाया गया कि:
शीर्ष अमीर वर्ग की संपत्ति में तेज उछाल आया
मध्यम वर्ग की आय में मामूली वृद्धि हुई
गरीब वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार की रफ्तार धीमी रही
अमीरों की संपत्ति में भारी उछाल
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
मुकेश अंबानी की संपत्ति 3.62 लाख करोड़ से बढ़कर 9.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई
गौतम अडानी की संपत्ति 1.11 लाख करोड़ से बढ़कर 8.02 लाख करोड़ रुपये तक हो गई
सावित्री जिंदल की संपत्ति 0.41 लाख करोड़ से बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची
सुनील मित्तल की संपत्ति 0.54 लाख करोड़ से बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपये हुई
शिव नाडर की संपत्ति 1.01 लाख करोड़ से बढ़कर 2.89 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई
इन आंकड़ों से साफ है कि देश के शीर्ष उद्योगपतियों की संपत्ति में कई गुना वृद्धि हुई है।
आर्थिक असमानता क्यों बढ़ रही है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हैं:
बड़े उद्योगों और कॉर्पोरेट सेक्टर का तेजी से विस्तार
निवेश और शेयर बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी
तकनीकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रभाव
रोजगार के अवसरों में असंतुलन
समाज पर असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह अंतर इसी तरह बढ़ता रहा, तो इससे समाज में असंतुलन और असंतोष बढ़ सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक समान पहुंच न होने से यह खाई और गहरी हो सकती है।
आगे क्या?
विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि:
सरकार को समावेशी नीतियों पर जोर देना चाहिए
गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अवसर बढ़ाने होंगे
शिक्षा और कौशल विकास में निवेश जरूरी है
भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह विकास सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा। अमीर और गरीब के बीच बढ़ती दूरी आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन सकती है, जिसे संतुलित नीति और योजनाओं के जरिए कम करना बेहद जरूरी है।






