सरकार के नए बिल पर विपक्ष का सवाल, CAPF में IPS तैनाती को लेकर बढ़ी बहस

नई दिल्ली: संसद के चल रहे सत्र में केंद्र सरकार की उस योजना पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की तैनाती को कानूनी रूप देने के लिए नया विधेयक लाने की तैयारी है। विपक्ष का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के विपरीत है।

 

 क्या है पूरा मामला?

सरकार एक ऐसा कानून लाने पर विचार कर रही है, जिसके जरिए CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (deputation) को औपचारिक रूप से लागू किया जा सके। हालांकि, इस विषय पर पहले ही सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कर चुका है कि धीरे-धीरे IPS अधिकारियों की तैनाती को कम किया जाना चाहिए और CAPF के अपने अधिकारियों को अधिक अवसर दिए जाने चाहिए।

 

सुप्रीम कोर्ट का क्या था फैसला?

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि CAPF के ग्रुप A अधिकारियों को संगठित सेवा (Organised Group A Service) का दर्जा दिया जाए। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया था कि आने वाले समय में IPS अधिकारियों की तैनाती को IG स्तर तक सीमित करते हुए धीरे-धीरे कम किया जाए।

 

CAPF अधिकारियों की चिंता

CAPF के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें पदोन्नति में देरी और करियर में ठहराव का सामना करना पड़ रहा है। कई अधिकारियों को पहली पदोन्नति पाने में ही 15 से 18 साल तक का समय लग जाता है, जो कि एक गंभीर समस्या है।

वर्तमान में:

. DIG (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) के लगभग 20% पद

See also  गैस संकट: व्यावसायिक सिलेंडर की सप्लाई रुकी, घरेलू उपभोक्ताओं को भी हो रही परेशानी

. IG (इंस्पेक्टर जनरल) के करीब 50% पद

IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं, जिससे CAPF के अपने अधिकारियों के लिए अवसर सीमित हो जाते हैं।

 

जमीनी हकीकत भी आई सामने

हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने CRPF के एक अधिकारी अजय मलिक से मुलाकात की, जो झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान IED विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अपना एक पैर गंवा बैठे।

यह घटना CAPF जवानों की चुनौतियों और बलिदान को उजागर करती है।

 

CAPF की ताकत और संरचना

देश के विभिन्न सुरक्षा अभियानों में तैनात CAPF की कुल संख्या लगभग 10 लाख के आसपास है, जिसमें करीब 13,000 ग्रुप A अधिकारी शामिल हैं। ये बल देश की आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

सरकार बनाम विपक्ष: क्या है टकराव?

विपक्ष का आरोप है कि सरकार का यह प्रस्ताव CAPF अधिकारियों के अधिकारों को कमजोर कर सकता है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी है। वहीं, सरकार का मानना है कि इस कदम से प्रशासनिक स्पष्टता और समन्वय बेहतर होगा।

 

CAPF में IPS अधिकारियों की तैनाती को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में संसद में इस प्रस्ताव पर तीखी चर्चा होने की संभावना है, जिसका असर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और बलों के मनोबल पर भी पड़ सकता है।

Related Posts

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

पटना। बिहार की राजधानी पटना में चर्चित शिक्षाविद और यूट्यूबर फैसल खान, जिन्हें छात्र समुदाय में “खान सर” के नाम से जाना जाता है, हाल ही में हुए फायरिंग और…

Read more

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

मुंबई। महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ-शिशु देखभाल के क्षेत्र में प्रगति दर्ज की गई है, लेकिन जन्म के समय लड़कियों और लड़कों के अनुपात को लेकर राज्य की स्थिति…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रकृति को बचाने का संकल्प लेने का दिन

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रकृति को बचाने का संकल्प लेने का दिन

मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, ICU में भर्ती 5 मरीजों की मौत, कई घायल

मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, ICU में भर्ती 5 मरीजों की मौत, कई घायल

मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा

मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा