पटना
राज्य सरकार ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुविधाओं को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। बजट सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में हुई चर्चा में बताया गया कि अब प्रदेश की सभी पुलिस लाइनों में चरणबद्ध तरीके से हाईस्कूल और स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य वर्दीधारियों के परिवारों—खासकर बच्चों और बुजुर्गों—को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत देना है।
बच्चों की पढ़ाई अब पास में
अब तक कई पुलिसकर्मी ऐसे थे जिनके बच्चे पढ़ाई के लिए दूर के स्कूलों में जाते थे। ड्यूटी की अनिश्चितता, ट्रांसफर और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई योजना के तहत:
. पुलिस लाइन परिसर में ही हाईस्कूल स्तर तक शिक्षा उपलब्ध होगी
. पुलिसकर्मियों के बच्चों को प्राथमिकता प्रवेश
. छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सहायता की व्यवस्था
. पढ़ाई का माहौल सुरक्षित और अनुशासित
इससे माता-पिता की चिंता कम होगी और बच्चों की पढ़ाई नियमित रह सकेगी।
स्वास्थ्य सुविधाएँ भी होंगी नजदीक
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हर पुलिस लाइन में अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसमें प्राथमिक उपचार, नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की व्यवस्था होगी।
इस फैसले का सीधा फायदा उन परिवारों को मिलेगा जिन्हें मामूली इलाज के लिए भी शहर के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती थी। विशेष रूप से रात की ड्यूटी करने वाले जवानों और उनके परिवारों के लिए यह व्यवस्था काफी राहत देने वाली मानी जा रही है।
भोजन और रहने की व्यवस्था में सुधार
योजना में पुलिस लाइनों के भीतर रहने वाले कर्मियों के लिए सामुदायिक रसोई (मेस) को बेहतर बनाने का भी प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार:
. पौष्टिक भोजन की व्यवस्था
. साफ-सुथरे किचन
. बैरक और आवास की मरम्मत
. पानी और स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार
इससे जवानों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य दोनों बेहतर होंगे।
कितने परिवारों को मिलेगा लाभ
राज्य में वर्तमान में दर्जनों पुलिस लाइनें संचालित हैं और उनमें हजारों परिवार रहते हैं। अनुमान है कि लगभग बीस हजार से अधिक पुलिस परिवार सीधे तौर पर इस योजना से प्रभावित होंगे। सरकार का कहना है कि यह केवल सुविधा नहीं बल्कि “कल्याणकारी सुधार” है।
नई भर्ती और आधारभूत ढांचे पर जोर
सत्र के दौरान यह भी बताया गया कि पुलिस बल को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर नई नियुक्तियाँ की जाएंगी। आने वाले समय में:
. हजारों नए जवानों की भर्ती
. प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तार
. आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता
. आवासीय सुविधाओं का उन्नयन
. सरकार का लक्ष्य है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो और पुलिसकर्मियों का मनोबल ऊंचा रहे।
क्यों जरूरी था यह फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसकर्मी 24 घंटे जिम्मेदारी निभाते हैं। त्योहार, आपदा, चुनाव या आपात स्थिति—हर समय वे ड्यूटी पर रहते हैं। ऐसे में उनके परिवारों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब जवान अपने परिवार की चिंता से मुक्त रहेंगे, तभी वे बेहतर तरीके से कानून-व्यवस्था संभाल पाएंगे।
मानवीय पहल की झलक
यह योजना केवल ढांचागत विकास नहीं बल्कि भावनात्मक पहल भी मानी जा रही है। अक्सर देखा गया है कि लंबी ड्यूटी और अलग-थलग पोस्टिंग के कारण पुलिस परिवारों को सामाजिक और शैक्षणिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं। अब बच्चों की पढ़ाई, इलाज और भोजन की मूल सुविधाएँ परिसर में ही मिलने से उनका जीवन आसान होगा।
आगे क्या
सरकार ने संकेत दिया है कि योजना को चरणों में लागू किया जाएगा। पहले बड़े शहरों की पुलिस लाइनों में काम शुरू होगा और उसके बाद अन्य जिलों तक विस्तार किया जाएगा। बजट प्रावधान होने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
यह पहल केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कोशिश है। अगर योजना समय पर लागू होती है, तो यह राज्य के सुरक्षा तंत्र और जवानों के मनोबल—दोनों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

















