सपा से निष्कासित विधायक पूजा पाल की सीएम योगी से मुलाकात, यूपी की राजनीति में हलचल तेज

न्यूज़ डेस्क पटना :  उत्तर प्रदेश की राजनीति में शनिवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। समाजवादी पार्टी से हाल ही में निकाली गई विधायक पूजा पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ स्थित उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात न सिर्फ़ सियासी गलियारों में चर्चाओं का विषय बनी, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के समीकरण भी बदल सकती है।

सपा से निष्कासन के बाद नई सियासी राह?

14 अगस्त को समाजवादी पार्टी ने कड़ा कदम उठाते हुए विधायक मनोज कुमार पांडेय, राकेश सिंह और अभय सिंह के साथ पूजा पाल को भी पार्टी से बाहर कर दिया था। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पत्र जारी कर उनके निष्कासन की घोषणा की।
माना जा रहा है कि सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की न्यायप्रियता और प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तारीफ़ करना, उनके खिलाफ सपा आलाकमान के फैसले की बड़ी वजह बनी।

पूजा पाल की सीएम योगी से मुलाकात के बाद अटकलें तेज़ हो गई हैं कि क्या वह भाजपा की ओर रुख कर सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुलाकात आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।

राजू पाल हत्याकांड से राजनीति में एंट्री

प्रयागराज के कटघर मोहल्ले में पली-बढ़ीं पूजा पाल की ज़िंदगी 2005 में उस समय बदल गई जब उनकी शादी शहर पश्चिमी के तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल से हुई।
लेकिन विवाह के महज़ कुछ दिन बाद ही, 25 जनवरी को, प्रयागराज की सड़कों पर दिनदहाड़े गोलियों की बौछार से राजू पाल की हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज़ हत्या कांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिला दिया था।

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इस घटना के बाद शहर में दंगे और हिंसा भड़क उठी थी। पूजा पाल ने तत्कालीन बाहुबली नेता अतीक अहमद और उनके छोटे भाई अशरफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। यह मामला आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध की कड़वी हकीकत के रूप में याद किया जाता है।

मायावती से लेकर विधायक बनने तक का सफर

राजू पाल की हत्या के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती प्रयागराज पहुंचीं और विधवा बनीं पूजा पाल को राजनीतिक सहारा दिया। उन्होंने शहर पश्चिमी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पूजा पाल को टिकट दिया। हालांकि, उस चुनाव में पूजा पाल को हार का सामना करना पड़ा क्योंकि सपा ने इस सीट से अतीक अहमद के भाई अशरफ को प्रत्याशी बनाया था।

लेकिन राजनीति में जुझारूपन दिखाते हुए पूजा पाल ने 2007 के विधानसभा चुनाव में फिर चुनाव लड़ा और इस बार अशरफ को हराकर इतिहास रच दिया। यहीं से उनकी राजनीति की असली पारी शुरू हुई।

आगे की राह पर सबकी नज़र

आज, लगभग दो दशक बाद, पूजा पाल का राजनीतिक सफर एक नए मोड़ पर है। समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद उनका सीएम योगी से मिलना संकेत देता है कि आने वाले समय में वह भाजपा के पाले में खड़ी दिखाई दे सकती हैं।
प्रदेश की राजनीति में पहले से ही सत्ता और विपक्ष के बीच खींचतान तेज़ है, ऐसे में पूजा पाल जैसे प्रभावशाली चेहरे का पार्टी बदलना सियासी समीकरणों को पूरी तरह से हिला सकता है।

सोर्स: मीडिया रिपोर्ट्स

Ayush Mishra

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