राज्य सरकार ने शिक्षकों से जुड़े गैर-शैक्षणिक कामों पर बड़ा निर्णय लिया है। अब शिक्षकों को हर तरह के प्रशासनिक कामों में नहीं लगाया जाएगा। सरकार के अनुसार उनकी सेवाएँ केवल जनगणना, आपदा राहत और चुनाव संबंधी कार्यों तक ही सीमित रहेंगी।
शिक्षा विभाग का कहना है कि लंबे समय से शिक्षक अलग-अलग सरकारी कार्यों में लगाए जाते रहे, जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था का मकसद यही है कि कक्षाओं का संचालन नियमित रहे और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
शिक्षा मंत्री ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इन तीन जरूरी सरकारी दायित्वों के अलावा शिक्षकों से कोई अन्य काम नहीं कराया जाएगा। यदि किसी स्थान पर शिक्षकों को अनावश्यक कार्य सौंपा जाता है, तो वे इसकी शिकायत सीधे संबंधित विभाग या पोर्टल पर कर सकेंगे।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि शिक्षकों की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखा जाएगा। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों के शिक्षण कार्य को प्राथमिकता दी जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई असर न पड़े।
इस फैसले से शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो सकेंगी और पढ़ाई का नुकसान कम होगा।

















