श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आते ही हर जगह भक्ति और उल्लास का माहौल बन जाता है। मंदिरों में घंटियों की गूंज, गलियों में झांकियों की सजावट और घर-घर में कान्हा की झूला सजाने की परंपरा—सब मिलकर इस दिन को और पावन बना देते हैं। ऐसे मौके पर भजन-कीर्तन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि भजन केवल गीत नहीं होते, बल्कि भगवान से जुड़ने का एक जरिया होते हैं।
हम सब जानते हैं कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल लीलाओं और बाल रूप तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने गीता के माध्यम से पूरी दुनिया को धर्म और कर्म का संदेश दिया। इसलिए उनके भजनों में प्रेम, श्रद्धा और जीवन दर्शन तीनों का समावेश मिलता है।
जनमाष्टमी की रात जब कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाता है, तो लोग “श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी” जैसे भजनों का गायन कर माहौल को और दिव्य बना देते हैं। इस भजन की खासियत यह है कि इसमें भगवान को माता-पिता, मित्र और स्वामी—हर रूप में याद किया जाता है। मानो भक्त अपने जीवन के हर रिश्ते में सिर्फ कृष्ण को देखता है। यही कारण है कि यह भजन सदियों से कृष्णभक्तों की पहली पसंद रहा है।
अब आइए, आप भी इस जन्माष्टमी पर अपने कान्हा को याद करते हुए यह भजन गुनगुनाएँ और अपने मन को भक्ति भाव से भर लें।
श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी
श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी
हे नाथ नारायण वासुदेवा
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही सखा और सच्चा सहारा
मुरली की धुन, राधा का संग
तेरे बिना जग है अधूरा
वृंदावन की हर गली पुकारे
गोकुल का हर बच्चा तुझसे निहारे
तेरे चरणों में है मोक्ष का मार्ग
तेरे नाम से कटे हर भार
जय कन्हैया, जय नंदलाल
भक्तों के रखवाले गोपाल


















