देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवारों को सहारा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत शहीद जवानों के आश्रितों को जीविका और सम्मानजनक जीवन के लिए कृषि भूमि प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना भी है।
क्या है नई योजना?
सरकार ने तय किया है कि शहीद सैनिकों के निकट परिजनों को लगभग एक एकड़ कृषि योग्य जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। यह जमीन उन्हें खेती या आवासीय उपयोग के लिए दी जा सकेगी ताकि परिवार नियमित आय का साधन विकसित कर सके और भविष्य सुरक्षित हो।
. जमीन सरकारी अभिलेखों से चिन्हित कर आवंटित होगी
. प्राथमिकता उन परिवारों को मिलेगी जिनकी आय सीमित है
. आवंटन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रखने का दावा किया गया है
परिवारों को कैसे मिलेगा लाभ?
नई नीति के तहत संबंधित विभाग पहले पात्र परिवारों की सूची तैयार करेगा। इसके बाद स्थानीय प्रशासन भूमि की उपलब्धता देखकर आवंटन करेगा।
इस योजना से परिवारों को कई प्रकार के फायदे मिलेंगे:
. स्थायी आय का स्रोत बनेगा
. खेती या किराये से आर्थिक सहारा मिलेगा
. सम्मानजनक जीवनयापन में मदद
. बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और भविष्य सुरक्षित करने में सहयोग
सरकार का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि शहीदों के परिजनों की सहायता सिर्फ अनुदान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें ऐसा साधन मिलना चाहिए जिससे वे लंबे समय तक आत्मनिर्भर रह सकें। भूमि उपलब्ध कराने से परिवार समाज में मजबूती से खड़ा हो पाएगा और उन्हें बार-बार सहायता पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
समाज के लिए संदेश
यह कदम सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के उन वीरों के प्रति सम्मान है जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपना जीवन न्यौछावर किया। इससे समाज में भी सकारात्मक संदेश जाएगा कि देश अपने रक्षकों के परिवारों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
कृषि भूमि आवंटन की यह पहल शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए राहत के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल सकती है। यदि योजना पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से लागू होती है, तो यह देशभर में एक आदर्श मॉडल बन सकती है और अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा साबित होगी।

















