नई दिल्ली में तैयार हुआ प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर “सेवा तीर्थ” सिर्फ एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक का संयुक्त प्रतीक बनकर सामने आया है। इसकी रचना ऐसी शैली में की गई है, जिसमें प्राचीन भारतीय मंदिरों और बौद्ध स्तूपों की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। लाल और सफेद बलुआ पत्थर से निर्मित यह परिसर भारतीय स्थापत्य परंपरा को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करता है।
क्यों खास है ‘सेवा तीर्थ’
यह विशाल परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे तैयार करने में करीब 1100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत लगी है। इमारत को पूरी तरह डिजिटल सुविधाओं से लैस किया गया है, जिससे प्रशासनिक कामकाज अधिक तेज और व्यवस्थित तरीके से हो सके।
मुख्य विशेषताएँ
. हाई-टेक डिजिटल कार्यालय और आधुनिक कार्यस्थल
. स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल और उन्नत सुरक्षा प्रणाली
. ऊर्जा बचत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक
. मॉनिटरिंग नेटवर्क व एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम
परिसर में क्या-क्या शामिल
सेवा तीर्थ में तीन प्रमुख प्रशासनिक इकाइयाँ स्थापित की गई हैं —
. प्रधानमंत्री कार्यालय
. कैबिनेट सचिवालय
. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
यहाँ कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय भी काम करेंगे, जिससे अलग-अलग भवनों में फैले विभाग अब एक ही परिसर में समन्वित रूप से कार्य कर सकेंगे।
वास्तुकला की खास बातें
इस भवन की डिजाइन केवल आधुनिक नहीं, बल्कि सोच-समझकर भारतीय संस्कृति से जोड़ी गई है।
डिजाइन की प्रमुख झलकियाँ
. भवन की बाहरी दीवारों में लाल-सफेद पत्थरों का प्रयोग, जो पुराने भारतीय नगरों की याद दिलाता है।
. कुछ संरचनाएँ बौद्ध स्तूपों की आकृति से प्रेरित धातु गुंबद शैली में बनाई गई हैं।
. जालीदार स्क्रीन ऐसी बनाई गई हैं कि दिनभर प्राकृतिक रोशनी भीतर आए और बिजली की खपत कम हो।
. प्रवेश द्वार की संरचना दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों की कारीगरी से प्रभावित है।
. इन तत्वों से भवन में रोशनी, वेंटिलेशन और गोपनीयता — तीनों का संतुलन बनाए रखा गया है।
पर्यावरण और कार्यकुशलता पर जोर
इमारत को जलवायु-अनुकूल बनाया गया है ताकि ऊर्जा की बचत हो और कर्मचारियों के लिए आरामदायक वातावरण बने। प्राकृतिक प्रकाश के उपयोग और बेहतर हवा के प्रवाह से कार्यालयों में सकारात्मक कार्य-संस्कृति विकसित करने का प्रयास किया गया है।
सरकार का संदेश
सरकार के अनुसार यह नया परिसर “सेवा” की भावना को दर्शाता है — यानी शासन का केंद्र जनता है। यह भवन प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है।
“सेवा तीर्थ” केवल एक कार्यालय परिसर नहीं, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक है जिसमें अतीत की विरासत और भविष्य की तकनीक साथ-साथ चलती हैं। भारतीय वास्तुकला की आत्मा को आधुनिक प्रशासनिक ढांचे में ढालकर यह परिसर देश के शासन-तंत्र को एक नई पहचान देता है।

















