Patna Desk: बिहार का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में खेत-खलिहान, ऐतिहासिक स्थल और पारंपरिक संस्कृति की तस्वीर उभरती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार में कुछ ऐसे झरने भी हैं जो किसी पहाड़ी राज्य से कम नहीं लगते?
विशेष रूप से रोहतास और कैमूर की पहाड़ियाँ मानसून में जीवंत हो उठती हैं। जैसे ही बारिश शुरू होती है, दर्जनों अस्थायी और स्थायी झरने बहने लगते हैं।
इतिहासकार अबुल फ़ज़ल ने अपनी मशहूर किताब आइन-ए-अकबरी में लिखा है कि बिहार में बरसात के मौसम में 200 से अधिक झरने दिखाई देते हैं। ये झरने कैमूर पहाड़ियों से निकलकर घाटियों में गिरते हैं और छोटे-छोटे झरनों से लेकर विशाल जलप्रपात का रूप ले लेते हैं।
मैंने खुद पिछले साल लगातार तीन हफ्तों तक मानसून में रोहतास और कैमूर का सफर किया और लगभग 15 झरनों को देखा। इनमें से 5 झरने इतने खूबसूरत हैं कि अगर आप एक बार देख लें, तो हर साल मानसून में लौटने का मन करेगा।
रोहतास की खासियत
रोहतास जिला पुराने ग्रैंड ट्रंक रोड (NH-2) और NH-119 से जुड़ा है। यह न केवल पटना, गया, बनारस जैसे शहरों से अच्छी तरह कनेक्टेड है, बल्कि दिल्ली-कोलकाता हाइवे पर होने के कारण दूर-दराज के राज्यों से भी पहुँचना आसान है।
मानसून के समय यहां का मौसम ठंडा, हवा शुद्ध और वातावरण रोमांच से भरपूर हो जाता है।
1. तुतला भवानी झरना – धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का संगम

लोकेशन: तिलौथू प्रखंड, देहरी-ऑन-सोन से 20 किमी दक्षिण-पश्चिम
कैसे पहुँचे: NH-119 से तिलौथू बाज़ार तक पहुँचें, फिर स्थानीय रास्ता लें। गूगल मैप और स्थानीय लोगों की मदद लें।
तुतला भवानी न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है बल्कि अब इसे इको-टूरिज्म साइट के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ स्थित जगद्धात्री महिषमर्दिनी दुर्गा का मंदिर श्रद्धालुओं के बीच खासा लोकप्रिय है।
खास अनुभव:
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1.5 किमी का आसान ट्रेक, जिसमें आप कैमूर की घाटी से गुजरते हुए झरने और मंदिर तक पहुँचते हैं।
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हैंगिंग ब्रिज से झरने और आसपास की पहाड़ियों का मनमोहक नज़ारा।
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झरने के नीचे स्नान का आनंद।
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वन विभाग की नर्सरी से पौधे खरीदने का मौका।
टिप्स:
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भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी पहुँचे।
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भारी बारिश में पानी का बहाव तेज हो जाता है, इसलिए सावधानी बरतें।
2. काशीस झरना – 800 फीट की ऊँचाई से गिरता स्वर्गीय नज़ारा

लोकेशन: अमझोर गाँव, तुतला भवानी से 10 किमी दूर
कैसे पहुँचे: NH-119 पर अमझोर तक जाएँ, फिर 2-3 किमी पहाड़ी रास्ता लें।
घने जंगलों के बीच बसा काशीश झरना लगभग 800 फीट की ऊँचाई से गिरता है। यहाँ पहुँचने के लिए थोड़ी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन नज़ारा देखकर सारी थकान मिट जाती है।
खास अनुभव:
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जंगलों के बीच छोटा ट्रेक।
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शांति और सुकून का माहौल।
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झरने के नीचे ठंडे पानी में नहाने का आनंद।
टिप्स:
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यहाँ मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो सकता है, इसलिए पहले से व्यवस्था करें।
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बरसात में फिसलन से बचने के लिए अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें।
3. मंझर कुंड और धुआं कुंड – पिकनिक और एडवेंचर का बेहतरीन कॉम्बो

लोकेशन: सासाराम, तारा चंडी मंदिर के पास
कैसे पहुँचे: तारा चंडी मंदिर से रोहतास घाटी की ओर जाने वाला रास्ता लें।
ये दो झरने एक-दूसरे के करीब हैं। मंझर कुंड पिकनिक और स्नान के लिए सुरक्षित जगह है, जबकि धुआं कुंड से गिरते पानी की फुहारें धुएं जैसा दृश्य बनाती हैं।
खास अनुभव:
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मंझर कुंड में परिवार के साथ पिकनिक और स्नान।
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मंझर कुंड की ऊँचाई से घाटी का अद्भुत दृश्य।
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धुआं कुंड मंदिर से 100 फीट ऊँचाई से गिरते झरने का रोमांच।
टिप्स:
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छुट्टियों में यहाँ भीड़ ज्यादा हो सकती है।
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बच्चों के साथ धुआं कुंड के पास जाने में सावधानी बरतें।
4. गीता घाट झरना – नहर के किनारे रोमांचक सफर

लोकेशन: सिकरिया गाँव, सासाराम-दरिगांव रोड
कैसे पहुँचे: सिकरिया से पहाड़ों की ओर जाने वाला रास्ता लें, जो नहर के साथ-साथ चलता है।
रास्ते में कई छोटे-बड़े झरने दिखाई देते हैं, जिनमें गीता घाट सबसे खूबसूरत है। यहां एक बाबा का आश्रम भी है, जहां से थोड़ा ऊपर चढ़कर झरने के शीर्ष तक पहुँचा जा सकता है।
खास अनुभव:
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बहते पानी के साथ-साथ कठिन ट्रेकिंग।
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कैमूर की पहाड़ियों और धान के खेतों का शानदार नज़ारा।
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रास्ते में कई और झरनों के दर्शन।
टिप्स:
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बरसात में पत्थर फिसलन भरे हो जाते हैं, सावधानी जरूरी है।
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कैमरा और जरूरी सामान वाटरप्रूफ बैग में रखें।
5. गुप्तधाम और धवलकुंड – आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक खूबसूरती का मिलन

लोकेशन: रोहतास घाटी, कैमूर की पहाड़ियाँ
कैसे पहुँचे: सासाराम से पनियारी घाट के रास्ते 11 किमी का ट्रेक, या कैमूर साइड से करमचट डैम के पास से रास्ता।
गुप्तधाम, भगवान शिव को समर्पित एक गुफा मंदिर है। यहाँ गुप्तेश्वर महादेव का शिवलिंग 363 फीट अंदर गुफा में स्थित है। सावन में यहाँ भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर से 1-2 किमी पैदल चलकर धवलकुंड झरना देखा जा सकता है।
खास अनुभव:
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कैमूर की पहाड़ियों में रोमांचक ट्रेक।
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गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन।
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धवलकुंड झरने की अद्भुत सुंदरता।
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घाटी और दुर्गावती नदी का पैनोरमिक व्यू।
यात्रा के लिए जरूरी टिप्स
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मानसून में पानी का बहाव तेज होता है, सावधानी बरतें।
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अच्छे ग्रिप वाले जूते और रेनकोट साथ रखें।
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कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक सामान वाटरप्रूफ बैग में रखें।
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खाने-पीने का सामान और पीने का पानी साथ ले जाएँ, क्योंकि कुछ जगहों पर दुकानें नहीं होतीं।
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स्थानीय गाइड की मदद लें, खासकर कठिन ट्रेक वाले झरनों के लिए।


















