सेना के साथ आसमान की सैर, राष्ट्रपति की उड़ान से बढ़ा जोश

भारत की राष्ट्रपति ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाया है, जिसने न सिर्फ सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाया बल्कि देशवासियों के दिल में भी गर्व की भावना भर दी। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में राष्ट्रपति ने भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की पहली ऐसी उड़ान मानी जा रही है।

यह केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सैनिकों के बीच जाकर उनका मनोबल बढ़ाने और देश की सैन्य क्षमता को करीब से समझने का संदेश भी था। जब राष्ट्रपति फ्लाइट सूट पहनकर हेलीकॉप्टर के पास पहुँचीं तो एयरबेस पर मौजूद जवानों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।

 

क्या है ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर

‘प्रचंड’ भारत में विकसित हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे खासतौर पर पहाड़ी और कठिन इलाकों में ऑपरेशन के लिए बनाया गया है।

यह लगभग 268 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है।

करीब 550 किलोमीटर तक बिना रुके उड़ान भरने की क्षमता रखता है।

ऊँचे पर्वतीय इलाकों में भी प्रभावी संचालन कर सकता है।

इस हेलीकॉप्टर को स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है, इसलिए यह “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

हथियारों से लैस ताकत

‘प्रचंड’ सिर्फ निगरानी के लिए नहीं, बल्कि युद्ध परिस्थितियों के लिए भी तैयार किया गया है। इसमें —

.  20 मिमी की शक्तिशाली तोप

.  रॉकेट सिस्टम

.  हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल

.  जैसे आधुनिक हथियार लगाए जा सकते हैं।

.  यह दुश्मन के बंकर, टैंक और कम ऊँचाई पर उड़ते लक्ष्य को भी निशाना बना सकता है।

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. राष्ट्रपति की उड़ान क्यों है खास

. यह उड़ान प्रतीकात्मक से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

. राष्ट्रपति ने जवानों से बातचीत की

. उनकी कार्य परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली

. और महिला शक्ति के संदेश को भी मजबूत किया

राष्ट्रपति देश की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर होती हैं। ऐसे में उनका खुद लड़ाकू हेलीकॉप्टर में बैठकर उड़ान भरना जवानों के लिए प्रेरणा बन गया। एयरबेस के अधिकारियों ने कहा कि यह पल सैनिकों के लिए “यादगार और उत्साहवर्धक” रहा।

 

पहले भी कर चुकी हैं साहसिक कदम

राष्ट्रपति इससे पहले लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं और नौसेना के युद्धपोत का निरीक्षण भी कर चुकी हैं। इस तरह वे लगातार तीनों सेनाओं के साथ समय बिताकर उनका मनोबल बढ़ाती रही हैं।

 

देश को क्या संदेश

इस घटना का बड़ा संदेश यह है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। स्वदेशी हथियार प्रणाली और उनमें देश के सर्वोच्च पद का भरोसा, दोनों मिलकर दुनिया को यह संकेत देते हैं कि भारत तकनीक और सुरक्षा के मामले में मजबूत हो रहा है।

रेगिस्तान की गर्म हवाओं के बीच उड़ता ‘प्रचंड’ और उसमें सवार राष्ट्रपति — यह दृश्य केवल एक उड़ान नहीं बल्कि आत्मविश्वास, साहस और आत्मनिर्भरता की उड़ान बन गया।

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