
पश्चिम एशिया के कई देशों में हाल के भू-राजनीतिक तनावों के कारण लोगों में खाद्य वस्तुओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस स्थिति का सीधा असर बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जहां आम लोगों ने आवश्यक वस्तुओं की अधिक मात्रा में खरीदारी शुरू कर दी है। इस बढ़ती मांग ने भारत सहित अन्य देशों के चावल और खाद्य उत्पाद निर्यातकों के लिए नए अवसर खोल दिए हैं।
मुंबई स्थित व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, चावल और अन्य खाद्य पदार्थों की सप्लाई पश्चिम एशिया की ओर तेजी से बढ़ी है। हालांकि, निर्यात के साथ जुड़े खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष रूप से माल ढुलाई (फ्रेट) और बीमा लागत लगभग दो से तीन गुना तक बढ़ चुकी है, जिससे उत्पादों की अंतिम कीमतों में इजाफा हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी किसी क्षेत्र में अस्थिरता या संकट की स्थिति बनती है, तो लोग जरूरत से ज्यादा सामान इकट्ठा करने लगते हैं। यही कारण है कि वर्तमान हालात में मांग अचानक बढ़ गई है और बाजारों में तेजी देखी जा रही है।
एक निर्यात कंपनी से जुड़े अधिकारी ने बताया कि लॉजिस्टिक्स यानी परिवहन और आपूर्ति प्रणाली इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई बंदरगाहों पर गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे समय पर डिलीवरी करना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद, बढ़ती मांग के चलते ग्राहक अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया के बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बनी हुई है और फिलहाल निर्यात में कोई बड़ी बाधा नहीं आ रही है। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का असर कीमतों पर साफ दिख रहा है, जहां औसतन 2% से 3% तक कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वर्तमान परिस्थितियों में निर्यातकों को जहां एक ओर अतिरिक्त मुनाफे का मौका मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बढ़ती लागत और अनिश्चितताओं से भी जूझना पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक खाद्य बाजारों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।





