वाशिंगटन, एजेंसी : एक अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्ट में 2010 से 2020 के बीच दुनिया की धार्मिक जनसंख्या में बड़े बदलाव सामने आए हैं। अध्ययन के मुताबिक वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ वृद्धि मुस्लिम समुदाय की हुई है, जबकि हिंदू जनसंख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में जन्मदर, उम्र संरचना और क्षेत्रीय आबादी को प्रमुख कारण बताया गया है।
मुस्लिम आबादी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
रिपोर्ट बताती है कि पिछले दस वर्षों में मुस्लिम जनसंख्या में लगभग 34 करोड़ की वृद्धि हुई। इसका मुख्य कारण कई देशों में अधिक जन्मदर और अपेक्षाकृत कम औसत आयु समूह (यानी युवा आबादी ज्यादा होना) माना गया है।
एशिया और अफ्रीका के देशों में यह वृद्धि सबसे अधिक दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां युवाओं की संख्या अधिक होती है, वहां स्वाभाविक रूप से जनसंख्या वृद्धि तेज रहती है — यही स्थिति मुस्लिम बहुल देशों में देखने को मिली।
हिंदू आबादी भी तेजी से बढ़ी
इसी अवधि में हिंदू समुदाय की जनसंख्या में भी करीब 12.6 करोड़ लोगों की बढ़ोतरी हुई।
यह वृद्धि मुख्य रूप से भारत और नेपाल जैसे देशों में प्राकृतिक जनसंख्या विस्तार (जन्मदर) के कारण हुई है।
हालांकि वृद्धि दर मुस्लिम समुदाय जितनी तेज़ नहीं रही, फिर भी कुल संख्या के हिसाब से यह एक बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।
अन्य धर्मों की स्थिति
. ईसाई धर्म अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना हुआ है।
. बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
. यहूदी और अन्य छोटे धार्मिक समुदायों में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति देखी गई।
. नास्तिक/धर्मनिरपेक्ष लोगों की संख्या भी कई विकसित देशों में बढ़ी है।
वृद्धि के पीछे क्या कारण रहे?
. रिपोर्ट के अनुसार जनसंख्या बदलाव के प्रमुख कारण:
. अलग-अलग समुदायों की जन्मदर में अंतर
. युवाओं का अनुपात (मीडियन एज)
. कुछ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
. प्रवासन (Migration)
मुस्लिम समुदाय की औसत आयु वैश्विक औसत से कम पाई गई, जिससे जन्मदर अधिक रही। वहीं कई विकसित देशों में कम जन्मदर के कारण कुछ धर्मों की वृद्धि धीमी रही।
भविष्य का अनुमान
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले दशकों में मुस्लिम और ईसाई आबादी के बीच अंतर कम हो सकता है। वहीं हिंदू समुदाय मुख्यतः दक्षिण एशिया क्षेत्र में केंद्रित रहेगा।
यह रिपोर्ट किसी धर्म की तुलना नहीं बल्कि वैश्विक जनसंख्या संरचना को समझने का एक प्रयास है। जनसंख्या परिवर्तन मुख्यतः सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और जन्मदर से प्रभावित होते हैं — और यही कारण है कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परिणाम देखने को मिल रहे हैं।


















