गया जी (बिहार), 13 अगस्त 2025 – राज्य में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने और संभावित आतंकी खतरों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए बुधवार को गयाजी एयरपोर्ट पर एक संयुक्त आतंकरोधी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना और किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता का आकलन करना था।
ड्रिल में बिहार एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) के साथ-साथ स्थानीय पुलिस, हवाईअड्डा प्रबंधन और अन्य संबंधित हितधारकों के अधिकारी एवं जवान शामिल हुए। अभ्यास के दौरान एक काल्पनिक आतंकी हमले की स्थिति को दर्शाया गया, जिसमें एयरपोर्ट के अंदर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर तत्काल सुरक्षा घेरा बनाया गया और संदिग्धों को पकड़ने की कार्रवाई की गई।
अभ्यास की प्रक्रिया और उद्देश्य
इस मॉक ड्रिल में वास्तविक परिस्थिति जैसा माहौल तैयार किया गया था। एयरपोर्ट परिसर में संदिग्ध व्यक्तियों की उपस्थिति की खबर मिलते ही सीआईएसएफ ने तुरंत यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जबकि बिहार एटीएस की टीम ने संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी की जिम्मेदारी संभाली। ड्रिल के दौरान बम निरोधक दस्ता (बीडीडीएस) और डॉग स्क्वॉड को भी सक्रिय किया गया।
अभ्यास का मुख्य फोकस था—
1. आपातकालीन हालात में त्वरित प्रतिक्रिया देना।
2. विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच संचार और समन्वय को परखना।
3. यात्रियों और एयरपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया का परीक्षण।
4. तकनीकी और मानवीय संसाधनों की कार्यक्षमता की समीक्षा।
सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया
ड्रिल के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभ्यास से सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित होता है। बिहार एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ऐसे मॉक ड्रिल हमें वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी खतरे की स्थिति में हमारी प्रतिक्रिया त्वरित और प्रभावी हो।”
सीआईएसएफ अधिकारियों ने भी बताया कि एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। इसलिए समय-समय पर इस तरह के अभ्यास बेहद जरूरी हैं।
स्थानीय प्रशासन का सहयोग
इस अभ्यास में स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग का भी सहयोग रहा। आपातकालीन निकासी प्रक्रिया के दौरान चिकित्सा टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया था, ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति में घायलों को तुरंत इलाज मिल सके।


















