
पटना: मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ जल्द ही पटना में एक बड़े राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन में लगभग 400 डॉक्टर और विशेषज्ञ भाग लेकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
यह सम्मेलन इंडियन सोसाइटी ऑफ पेरिनेटोलॉजी एंड रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी (ISOPARB) का 41वां राष्ट्रीय अधिवेशन है, जो 13 से 15 मार्च तक पटना में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विशेषज्ञ गर्भावस्था से लेकर सुरक्षित प्रसव और नवजात देखभाल तक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
मातृ और शिशु स्वास्थ्य पर होगी गहन चर्चा
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किस प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए और प्रसव के समय किन सावधानियों से मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विशेषज्ञ अपने अनुभव और शोध के आधार पर सुझाव साझा करेंगे।
लंबे अंतराल के बाद पटना में आयोजन
आयोजकों के अनुसार लगभग 10 वर्षों के बाद यह राष्ट्रीय सम्मेलन फिर से पटना में आयोजित हो रहा है। इससे पहले भी इस संस्था की स्थापना करीब 41 वर्ष पहले पटना में ही हुई थी, इसलिए इस शहर में सम्मेलन का आयोजन विशेष महत्व रखता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सहित कई राज्यों में अभी भी मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे सम्मेलन से नई चिकित्सा तकनीकों, बेहतर उपचार पद्धतियों और स्वास्थ्य नीतियों पर चर्चा होगी, जिससे आने वाले समय में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल सकती है।
देशभर के विशेषज्ञ होंगे शामिल
इस कार्यक्रम में देश के कई प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूति विशेषज्ञ और नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्र, शोध प्रस्तुतियां और चर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
आयोजन समिति से जुड़ी डॉ. मंजू गीता मिश्रा ने बताया कि यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। वहीं सम्मेलन की सचिव डॉ. प्रज्ञा मिश्रा चौधरी ने कहा कि इस आयोजन से मातृ और शिशु स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
समाज के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन
विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी प्राथमिकता होती है। ऐसे में डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं का एक मंच पर आना बेहतर समाधान तलाशने में मददगार साबित हो सकता है।





