पटना : राज्य में महिलाओं से जुड़े मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण रुझान सामने आया है। हाल के आँकड़ों के अनुसार महिला आयोग में दर्ज होने वाली शिकायतों का बड़ा हिस्सा घरेलू हिंसा, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और पारिवारिक विवादों से संबंधित है। यानी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दे अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी
पिछले एक वर्ष के दौरान आयोग को हजारों आवेदन प्राप्त हुए। इनमें सबसे अधिक शिकायतें पति-पत्नी विवाद, दहेज दबाव, मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक हिंसा से संबंधित पाई गईं। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पहले महिलाएँ सामाजिक दबाव या डर की वजह से शिकायत नहीं कर पाती थीं, लेकिन अब जागरूकता बढ़ने के कारण वे अपनी बात रखने आगे आ रही हैं।
किन मामलों की संख्या सबसे ज्यादा
आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक लगभग 80% प्रकरण प्रताड़ना और हिंसा से जुड़े हैं। इसमें
. घरेलू कलह
. मारपीट
. दहेज प्रताड़ना
. मानसिक दबाव
. संपत्ति और भरण-पोषण विवाद
जैसे मामले प्रमुख हैं।
जिलों से भी बड़ी संख्या में आवेदन
केवल बड़े शहर ही नहीं बल्कि छोटे जिलों से भी काफी संख्या में शिकायतें पहुँच रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएँ भी अब अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रही हैं। कई मामलों में पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय कर समझौता या कानूनी कार्रवाई कराई जा रही है।
आयोग की कार्यप्रणाली
महिला आयोग पहले दोनों पक्षों को सुनता है और सुलह कराने की कोशिश करता है। यदि मामला गंभीर होता है, तो संबंधित थाने और प्रशासनिक अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं। पीड़ित महिलाओं को काउंसलिंग और कानूनी सलाह भी उपलब्ध कराई जाती है।
जागरूकता बढ़ने से सामने आ रहीं समस्याएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायतों की संख्या बढ़ना केवल अपराध बढ़ने का संकेत नहीं है, बल्कि महिलाओं में अधिकारों के प्रति जागरूकता का भी परिणाम है। अब महिलाएँ चुप रहने के बजाय न्याय पाने के लिए आगे आ रही हैं।
महिला आयोग में आ रहे मामलों का स्वरूप बताता है कि समाज में घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना अभी भी बड़ी चुनौती है। हालांकि सकारात्मक पहलू यह है कि महिलाएँ अब अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए कानूनी रास्ता अपनाने लगी हैं, जो सामाजिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।


















