नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अधिकारियों के मुताबिक यदि सभी औपचारिकताएँ समय पर पूरी हुईं, तो यह समझौता अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है। इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को तेज़ करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।
दरअसल, दोनों देशों ने 24 जुलाई 2025 को इस व्यापक आर्थिक एवं व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। मौजूदा समय में भारत-ब्रिटेन के बीच लगभग 56 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे वर्ष 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योगों को क्या फायदा होगा
इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के कई क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। भारतीय कंपनियाँ अपने लगभग 99% उत्पाद ब्रिटेन को बिना आयात शुल्क के भेज सकेंगी। इससे खास तौर पर:
. टेक्सटाइल
. फुटवियर (जूते-चप्पल)
. ऑटो पार्ट्स
. रत्न-आभूषण
. रसायन एवं इंजीनियरिंग सामान
जैसे उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है।
कार और व्हिस्की पर भी असर
समझौते के तहत ब्रिटेन से आने वाली कारों और व्हिस्की पर भारत में लगने वाले ऊँचे आयात शुल्क को धीरे-धीरे कम किया जाएगा। अभी भारत कारों पर करीब 110% तक शुल्क वसूलता है। प्रस्ताव है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लगभग 10% तक लाया जाएगा, हालांकि पूरी कटौती एक बार में नहीं होगी ताकि घरेलू उद्योगों पर अचानक दबाव न पड़े।
कर्मचारियों को भी राहत
दोनों देशों ने एक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सहमति बनाई है। इसके तहत किसी एक देश में काम करने वाले दूसरे देश के कर्मचारियों को दोबारा सामाजिक सुरक्षा अंशदान नहीं देना पड़ेगा। इससे भारतीय पेशेवरों और कंपनियों का खर्च कम होगा।
क्या बदलेगा आगे
. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता लागू होने पर:
. भारतीय निर्यातकों को नया बड़ा बाजार मिलेगा
. विदेशी निवेश बढ़ सकता है
. नौकरियों के अवसर पैदा होंगे
. व्यापारिक प्रक्रियाएँ सरल होंगी
कुल मिलाकर यह समझौता भारत-ब्रिटेन आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है और आने वाले वर्षों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।


















