गया जी (बिहार):
बिहार के गया जिले में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम उस समय विवाद का केंद्र बन गया, जब जनसुराज पार्टी से जुड़े नेता रामाधार सिंह के पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने उनका तीखा विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि मंच पर मौजूद बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा और सुरक्षाकर्मियों को रामाधार सिंह को कार्यक्रम से बाहर निकालने का निर्देश देना पड़ा।
“भूमाफिया मुर्दाबाद” के नारों से गूंज उठा परिसर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही रामाधार सिंह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, भीड़ में मौजूद लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। “भूमाफिया मुर्दाबाद” जैसे नारों से पूरा हॉल गूंज उठा। विरोध कर रहे लोगों का आरोप था कि रामाधार सिंह क्षेत्र में जमीन से जुड़े अवैध कब्जे और विवादों में संलिप्त रहे हैं। लगातार नारेबाजी के कारण कार्यक्रम की कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित हो गई।
रामाधार सिंह का पक्ष: “मैं सामाजिक आदमी हूं”
हंगामे के बीच रामाधार सिंह खुद को निर्दोष बताते नजर आए। उन्होंने कहा,
“मुझ पर कोई 107 का केस नहीं है। मैं गरीब लड़कियों की शादी करवाता हूं, सामाजिक काम करता हूं। मुझे बदनाम किया जा रहा है।”
उनके इस बयान के बाद कई सवाल खड़े होते हैं। अगर उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है, तो फिर स्थानीय लोगों में इतना गुस्सा क्यों है? क्या यह केवल राजनीतिक विरोध है या फिर जमीन से जुड़े आरोपों के पीछे कोई ठोस वजह भी है?
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सवालों के घेरे में छवि और राजनीति
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामाधार सिंह का नाम लंबे समय से जमीन विवादों से जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि
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क्या प्रशासन ने इन आरोपों की कभी निष्पक्ष जांच करवाई?
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अगर आरोप निराधार हैं, तो जनता के बीच यह धारणा बनी कैसे?
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और यदि आरोपों में सच्चाई है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनसुराज से अलग होने और टिकट नहीं मिलने के बाद रामाधार सिंह की राजनीति का रुख बदला, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष और बढ़ा।
डिप्टी सीएम का सख्त संदेश
हालात बिगड़ते देख उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंच से ही सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि
“ऐसे तत्वों के लिए सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कोई जगह नहीं है। भूमाफिया जैसे लोगों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने रामाधार सिंह को घेरे में लेकर कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया। इस कार्रवाई को कई लोगों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया, तो कुछ ने इसे जल्दबाजी भरा कदम भी कहा।
सोशल मीडिया एक्टिविटी भी चर्चा में
रामाधार सिंह की सोशल मीडिया सक्रियता भी इस पूरे विवाद में चर्चा का विषय बनी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सोशल मीडिया रील्स बनाने में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। हालांकि, उनके समर्थकों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए जनता तक अपनी बात पहुंचाना आज के दौर की जरूरत है।
फिलहाल इस पूरे मामले में आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक ओर जनता का गुस्सा है, तो दूसरी ओर रामाधार सिंह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताकर सभी आरोपों से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में सच्चाई क्या है, यह जांच और तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। लोकतंत्र में सवाल उठना जरूरी है, लेकिन जवाब भी उतने ही जरूरी हैं।


















