
नई दिल्ली: देश में होने वाली अगली जनगणना अब पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत होने जा रही है। सरकार इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा।
पहली बार डिजिटल जनगणना की तैयारी
आने वाली जनगणना में पारंपरिक कागजी प्रक्रिया के साथ-साथ डिजिटल सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा। यानी अब लोगों के पास यह सुविधा होगी कि वे अपनी जानकारी मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए ऑनलाइन भर सकें। इससे प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होने की उम्मीद है।
घर-घर जाने के साथ ऑनलाइन विकल्प भी
जनगणना कर्मचारी पहले की तरह घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करेंगे, लेकिन अगर कोई व्यक्ति खुद ही अपनी जानकारी देना चाहता है, तो वह डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर सकेगा। इससे समय की बचत होगी और डेटा एंट्री में होने वाली गलतियों में भी कमी आएगी।
जनगणना दो चरणों में पूरी होगी
इस पूरी प्रक्रिया को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। पहले चरण में घरों और मकानों से जुड़ी जानकारी ली जाएगी, जबकि दूसरे चरण में लोगों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी। दोनों चरणों के बीच कुछ समय का अंतर रखा जाएगा ताकि डेटा को व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सके।
सुरक्षा और गोपनीयता पर खास ध्यान
सरकार का कहना है कि डिजिटल जनगणना के दौरान लोगों की निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। डेटा को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की जानकारी लीक न हो।
आधार और अन्य दस्तावेजों की जरूरत नहीं
इस बार जनगणना में लोगों को किसी भी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड या पहचान पत्र दिखाने की अनिवार्यता नहीं होगी। जानकारी केवल लोगों द्वारा दिए गए जवाबों के आधार पर ही दर्ज की जाएगी।
तकनीक से जुड़े फायदे
डिजिटल सिस्टम के आने से जनगणना की प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी, बल्कि इससे आंकड़ों का विश्लेषण भी आसानी से किया जा सकेगा। सरकार को योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी और सही आंकड़ों के आधार पर विकास कार्यों को दिशा मिलेगी।
कोरोना के कारण पहले टली थी प्रक्रिया
दरअसल, पिछली बार जनगणना की प्रक्रिया कोरोना महामारी की वजह से शुरू नहीं हो पाई थी। अब हालात सामान्य होने के बाद इसे फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
2027 तक पूरी होने की संभावना
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस पूरी जनगणना प्रक्रिया को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
डिजिटल जनगणना भारत के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा की सटीकता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह प्रक्रिया देश की योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।






