पटना:होली नज़दीक आते ही बाज़ारों में रंगों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कुछ बच्चों ने त्योहार को खास और सुरक्षित बनाने की अनोखी पहल शुरू की है। पटना के एक बाल प्रशिक्षण केंद्र में बच्चे अपने हाथों से प्राकृतिक गुलाल तैयार कर रहे हैं, जिससे त्वचा और पर्यावरण दोनों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि गुलाबी रंग के लिए चुकंदर का उपयोग किया जा रहा है। पहले चुकंदर को काटकर सुखाया जाता है, फिर उसे पीसकर महीन पाउडर तैयार किया जाता है। इसके बाद उसमें अरारोट और गुलाब जल मिलाकर मुलायम गुलाल बनाया जाता है, जो त्वचा के लिए सुरक्षित होता है।
बच्चे केवल गुलाबी ही नहीं बल्कि कई अन्य रंग भी तैयार कर रहे हैं।
. पीला रंग हल्दी से
. हरा रंग पालक से
. नीला रंग अपराजिता के फूल से
. नारंगी रंग पलाश के फूल से
. लाल रंग कचनार के फूल से बनाया जा रहा है
. इन सभी रंगों में रसायन का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए आंखों, त्वचा और बालों को कोई हानि नहीं होती।
प्रशिक्षकों के अनुसार हर साल बच्चे दो तरह के गुलाल तैयार करते हैं — एक पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से और दूसरा खाद्य-ग्रेड रंगों के हल्के उपयोग से। इस पहल का उद्देश्य लोगों को केमिकल रंगों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना है।
बच्चों द्वारा तैयार किए गए ये रंग अब लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। कई लोग पहले से ही इनकी बुकिंग कर रहे हैं ताकि होली सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक तरीके से मनाई जा सके।
इस प्रयास से बच्चों में हुनर भी विकसित हो रहा है और समाज को एक संदेश भी मिल रहा है कि त्योहार खुशियों का होना चाहिए, नुकसान का नहीं। प्राकृतिक रंगों की वापसी के साथ होली एक बार फिर पारंपरिक और सुरक्षित रूप में लौटती दिख रही है।


















