बिहार की बेटियों ने रचा इतिहास: पिंक बस की ड्राइविंग सीट पर पहली बार महिलाएं

बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है। राज्य परिवहन व्यवस्था में अब बदलाव की रफ्तार महिलाओं के हाथों में है। पिंक बस सेवा से जुड़कर कुछ युवा महिलाओं ने न केवल ड्राइविंग सीट संभाली, बल्कि समाज की सोच को भी नई दिशा दी है।

 पिंक बस सेवा में महिला ड्राइवरों की एंट्री

बिहार राज्य सड़क परिवहन निगम (BSRTC) की पिंक बसों को अब महिलाएं चला रही हैं। यह पहली बार है जब राज्य में महिला ड्राइवरों को सार्वजनिक बस संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। ये बसें खास तौर पर महिला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर चलाई जा रही हैं।

 कौन हैं ये महिलाएं?

इन महिला ड्राइवरों की उम्र लगभग 21 से 22 वर्ष के बीच है। ये सभी राज्य के पिछड़े और वंचित समुदायों से आती हैं। कठिन परिस्थितियों और सामाजिक दबावों के बावजूद इन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया और अब बस संचालन कर रही हैं।

 प्रशिक्षण और लाइसेंस की प्रक्रिया
महिलाओं ने पहले लाइट मोटर व्हीकल (LMV) का लाइसेंस प्राप्त किया
इसके बाद हेवी मोटर व्हीकल (HMV) का प्रशिक्षण पूरा किया
BSRTC द्वारा विशेष ट्रेनिंग, आवास और भोजन की सुविधा दी गई
प्रशिक्षण के बाद कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर नियुक्ति की गई

 गणतंत्र दिवस पर दिखेगा खास नज़ारा

इन महिला ड्राइवरों की पिंक बसें पटना में गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा भी बनीं। यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय रहा।

समाज की सोच से जंग

शुरुआत में परिवार और समाज की ओर से सवाल उठे—
“लोग क्या कहेंगे?”
“महिलाएं बस कैसे चलाएंगी?”
लेकिन इन महिलाओं ने अपने आत्मविश्वास और कौशल से हर आशंका को गलत साबित कर दिया।

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 पिंक बस सेवा: महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर

पिंक बसें केवल महिलाओं के लिए चलाई जा रही हैं और राज्य के कई शहरों में पहले ही शुरू हो चुकी हैं। भविष्य में और अधिक महिला ड्राइवरों को शामिल करने की योजना है।

बिहार की यह पहल बताती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं। पिंक बस की ड्राइविंग सीट पर बैठी ये महिलाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

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