बिहार में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार कड़ा कदम उठाने जा रही है। अब अगर कोई व्यक्ति जमीन के जाली कागज़ात तैयार करता या इस्तेमाल करता पकड़ा गया, तो उसे सीधे जेल जाना पड़ सकता है। इसके साथ-साथ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में बड़े पैमाने पर नियुक्तियों की तैयारी भी शुरू हो गई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी।
फर्जी दस्तावेज़ देने पर सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि जमीन संबंधी धोखाधड़ी को अपराध की गंभीर श्रेणी में रखा जाएगा।
. जाली दस्तावेज़ देने या बनवाने पर अनिवार्य रूप से FIR दर्ज होगी
. दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान किया जा रहा है
. पूरे राज्य में जमीन रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रहेगी
. लोगों की शिकायतों के लिए जिला स्तर पर विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होंगे
. इस कदम का मुख्य उद्देश्य है कि जमीन खरीद-फरोख्त में हो रही ठगी, कब्जा विवाद और फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगाई जा सके।
विधानसभा में उठा मुद्दा
विधानसभा में विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि जमीन विवाद आम नागरिकों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है।
इसी कारण अब प्रशासनिक स्तर पर शिकायत दर्ज करने से लेकर जांच और कार्रवाई तक पूरी प्रक्रिया को अनिवार्य और पारदर्शी बनाया जाएगा।
युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी – 16,584 पदों पर भर्ती
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी थी। इसे दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
. कुल 16,584 पदों पर भर्ती की तैयारी
. चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है
. रोस्टर क्लियरेंस के बाद चरणबद्ध नियुक्ति
. आने वाले समय में हजारों पदों पर और बहाली की संभावना
सरकार का मानना है कि पर्याप्त कर्मचारी होने से जमीन सर्वे, रसीद, दाखिल-खारिज और रजिस्ट्रेशन कार्य तेजी से होंगे और लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए
जमीन खरीदते समय धोखाधड़ी कम होगी
शिकायत करने पर तुरंत केस दर्ज होगा
रिकॉर्ड अपडेट और नामांतरण तेज़ी से होगा
सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों की संख्या घटेगी
जमीन विवाद अक्सर आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी कानूनी परेशानी बन जाता है। सरकार की नई नीति दो तरफ काम करेगी—
एक ओर फर्जी दस्तावेज़ बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई, और दूसरी ओर अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति से सेवा में तेजी।
अगर नियम सही तरीके से लागू हुए, तो आने वाले समय में जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।

















