कचरे का पहाड़ बनता बिहार: इन इलाकों में सबसे ज्यादा बिगड़े हालात
बिहार में कचरा अब सिर्फ शहरी समस्या नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों, नदियों के किनारों और हरियाली वाले क्षेत्रों तक फैल चुका है। कई जिलों में खुले में जमा कचरा धीरे-धीरे पहाड़ का रूप ले रहा है, जिससे जमीन, पेड़ और जल स्रोत बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
बिहार में कहां-कहां जमा है सबसे ज्यादा कचरा
पटना
राजधानी पटना में बाईपास इलाके, कंकड़बाग, दानापुर, दीघा और गंगा किनारे के क्षेत्रों में कचरे के बड़े ढेर देखे जा सकते हैं। यहां प्लास्टिक और निर्माण मलबे के कारण जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है।
गया
गया शहर और फल्गु नदी के आसपास खुले में फेंका गया कचरा लगातार बढ़ रहा है। धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र होने के बावजूद सफाई व्यवस्था कमजोर नजर आती है।
मुजफ्फरपुर
नगर निगम क्षेत्र के बाहरी हिस्सों, खासकर एनएच के किनारे और खाली सरकारी जमीन पर कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिससे आसपास के गांव भी प्रभावित हो रहे हैं।
भागलपुर
गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों में घरेलू और प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है। इससे जल प्रदूषण के साथ-साथ जलीय जीवों पर भी खतरा बढ़ गया है।
दरभंगा
शहर के बाहरी इलाकों और तालाबों के पास कचरा डंप किया जा रहा है। बरसात में यही कचरा पानी में घुलकर पूरे क्षेत्र को दूषित कर देता है।
बेगूसराय और समस्तीपुर
औद्योगिक और शहरी विस्तार के कारण इन जिलों में भी कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बन चुका है। कई जगहों पर खेतों के पास ही कचरा फेंका जा रहा है।
पेड़ों और जमीन पर सीधा असर
इन सभी इलाकों में कचरे के कारण पेड़ों की जड़ें कमजोर हो रही हैं। जहरीले अपशिष्ट से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिससे हरियाली लगातार घटती जा रही है।
नदियों तक पहुंच रहा है कचरा
गंगा, फल्गु और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों में बहकर जाने वाला कचरा जल संकट को और गंभीर बना रहा है। इससे पीने के पानी और सिंचाई दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
समाधान अभी भी अधूरा
सरकार और नगर निकायों की योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन कई जिलों में कचरा निस्तारण की ठोस व्यवस्था नहीं होने से हालात जस के तस बने हुए हैं।
बिहार के कई शहर और कस्बे कचरे के ढेर में तब्दील होते जा रहे हैं। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा संकट बन सकती है।


















