बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत डिजिटल हेल्थ सिस्टम को तेज़ी से लागू किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को इलाज में पारदर्शिता, सुविधा और तेज़ सेवाएं मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बिहार में अब तक 6.11 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA ID) बनाए जा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।
क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन?
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देशभर में एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां मरीज का इलाज, रिपोर्ट, दवा और अस्पताल का रिकॉर्ड एक ही डिजिटल पहचान से सुरक्षित रहे। इससे मरीज को बार-बार कागज़ी रिपोर्ट ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बिहार को क्या होंगे फायदे?
. मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा
. सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज आसान होगा
. फर्जी इलाज और बिलिंग पर रोक लगेगी
. दूरदराज़ इलाकों में भी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी
. स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचेगा
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और निजी चिकित्सा संस्थानों को भी इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि डिजिटल सिस्टम का सही उपयोग हो सके।
आने वाले समय में क्या बदलेगा?
आने वाले दिनों में बिहार में ई-हॉस्पिटल, ई-प्रिस्क्रिप्शन और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं को और मज़बूत किया जाएगा। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों के मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा।
डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में बिहार की यह पहल न सिर्फ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए बिहार अब आधुनिक और तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

















