पटना |
बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में धान अधिप्राप्ति (खरीद) की समय-सीमा को आगे बढ़ाते हुए अब इसे 31 मार्च तक कर दिया गया है। पहले खरीद प्रक्रिया फरवरी के अंत तक समाप्त होनी थी, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों की उपज शेष रहने और भुगतान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया।
राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने खरीद अवधि बढ़ाने को मंजूरी दी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का कहना है कि इस फैसले से विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को अपनी फसल बेचने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
केंद्र से अनुरोध के बाद बढ़ी अवधि
राज्य के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने बताया कि 16 फरवरी को उन्होंने केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से बातचीत कर बिहार में धान खरीद की अवधि बढ़ाने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि कई किसानों की फसल देर से तैयार हुई और वे निर्धारित समय में अपनी उपज नहीं बेच पाए।
केंद्र की सहमति के बाद खरीद की अंतिम तारीख 31 मार्च तय कर दी गई।
मंत्री ने कहा कि यह फैसला किसानों की आय सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
खरीद का वर्तमान हाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष राज्य में लगभग 36.85 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। अब तक सहकारी समितियों और पैक्स केंद्रों के माध्यम से बड़ी मात्रा में खरीद हो चुकी है।
. करीब 4.28 लाख किसानों से धान की खरीद की गई
. लगभग 29.22 लाख मीट्रिक टन धान अधिप्राप्त
. लक्ष्य का लगभग 79 प्रतिशत हासिल
. कुल 6879 समितियों के जरिए खरीद प्रक्रिया संचालित
किसानों को सीधा भुगतान
सरकार का दावा है कि किसानों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। अब तक लगभग 6400 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
ग्रामीण इलाकों के कई किसानों का कहना है कि तारीख बढ़ने से उन्हें मंडियों तक धान पहुंचाने का मौका मिलेगा। कई जगहों पर कटाई देर से हुई, जिसके कारण पहले निर्धारित समयसीमा में वे अपनी फसल नहीं बेच पाए थे।
सरकार का लक्ष्य
राज्य सरकार का कहना है कि उसकी कोशिश है कि अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिले और कोई भी किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर न हो। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीद केंद्र नियमित रूप से खुले रहें और तौल व भुगतान में देरी न हो।
किसानों के लिए क्या मायने?
. विशेषज्ञों के अनुसार समय-सीमा बढ़ने से दो बड़े फायदे होंगे —
. जिन किसानों की फसल देर से तैयार हुई, वे भी सरकारी दर पर बेच सकेंगे।
. बाजार में गिरते दामों का दबाव कम होगा और किसानों को उचित कीमत मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह फैसला रबी सीजन से पहले किसानों की नकदी स्थिति मजबूत करने वाला माना जा रहा है। गांवों में उम्मीद है कि समय रहते भुगतान मिलने से अगली बुवाई की तैयारी भी आसान होगी।

















