पटना। बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को लेकर सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन जिलों में चीनी मिलें बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द चालू करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। सरकार का उद्देश्य सिर्फ उद्योग को पुनर्जीवित करना नहीं, बल्कि किसानों और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना भी है।
बैठक में कहा गया कि गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए चीनी उद्योग का सक्रिय होना बेहद जरूरी है। इसलिए संबंधित विभागों को तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं तुरंत दूर करने को कहा गया है। अधिकारियों को यह भी निर्देश मिला है कि निवेश और मशीनरी से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेज कर समयसीमा तय की जाए।
सरकार की योजना के अनुसार कई जिलों में चीनी मिलों का संचालन शुरू होगा। इनमें पश्चिम चंपारण का चनपटिया, पूर्वी चंपारण का मोतिहारी व बरियारपुर, गोपालगंज का सासामूसा, सारण का मढ़ौरा, मुजफ्फरपुर का मोतीपुर, समस्तीपुर का समस्तीपुर, तथा मधुबनी के सकरी और झंझारपुर क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन मिलों के चालू होने से आसपास के किसानों को गन्ना बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
उद्योग विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि निवेशकों से बातचीत जारी है और आधुनिकीकरण के जरिए मिलों को लाभकारी बनाया जाएगा। नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था लागू कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद मिलों के फिर से शुरू होने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ेगी और हजारों लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही परिवहन, व्यापार और छोटे उद्योगों को भी फायदा पहुंचेगा।
सरकार का मानना है कि चीनी उद्योग के पुनरुद्धार से बिहार के कई जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और राज्य के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

















