नेताओं के पोस्टर टंगे ऊँचाई पर, सबलपुर की जनता डूबी गंगा की गहराई में

सबलपुर पंचायत की यह स्थिति सिर्फ़ एक पंचायत की कहानी नहीं है, बल्कि गंगा किनारे बसे सैकड़ों गांवों का दर्द है। चार दर्जन से अधिक घरों का गिरना और लगातार जारी कटाव यह साबित करता है कि चुनावी शोर-शराबे के बीच जनता की असली समस्याएँ कहीं खो जाती हैं।

न्यूज डेस्क पटना : बिहार में विधानसभा चुनावी माहौल गरमा रहा है। हर दल अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच एक तस्वीर ने सुर्खियाँ बटोरी – एक पुल पर एक साथ RJD, BJP और जन सुराज पार्टी के बैनर टंगे दिखे। लेकिन इन चुनावी नारों और प्रचार के बीच एक सच्चाई ऐसी भी है जो वोट की राजनीति से कहीं बड़ी है – गंगा की बाढ़ और मिट्टी कटाव से जूझती जनता।

img 20250914 wa00058385352096099064724
कटाव के कारण ढहा घर

सबलपुर पंचायत में सबसे ज़्यादा तबाही

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गंगा नदी के बढ़े जलस्तर और लगातार मिट्टी कटाव की वजह से सबलपुर पंचायत का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। अब तक करीब चार दर्जन से अधिक घर धराशायी हो चुके हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। खेत बर्बाद हो चुके हैं, सड़कें बह गई हैं और गांव का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है।

एक स्थानीय किसान का कहना है, “हर साल यही हाल होता है, लेकिन इस बार तो हालात और भी खराब हैं। घर गिर गए, जमीन नदी में समा गई, अब कहाँ जाएँ?”

img 20250914 wa00069206891805876448735
बांध निर्माण को लेकर प्रदर्शन करते ग्रामीण


जनता का दर्द और नेताओं के बैनर

बैनरों में बड़े-बड़े वादे लिखे हैं – रोज़गार, विकास और किसान कल्याण। लेकिन सबलपुर और आसपास के लोगों के लिए ये वादे खोखले लगते हैं। एक महिला ने रोते हुए कहा, “बच्चों को लेकर कहाँ जाएँ? घर टूट गया, खेत डूब गया, मदद करने वाला कोई नहीं आया।”

image editor output image1092778196 17578464673637241744359137658643
परेशान ग्रामीण

साल दर साल वही समस्या

गंगा किनारे बसे इस इलाके में बाढ़ और कटाव नई समस्या नहीं है। हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ते ही मिट्टी कटाव शुरू हो जाता है और दर्जनों घर नदी में समा जाते हैं। राहत और पुनर्वास की बातें कागज़ों में होती हैं, लेकिन ज़मीन पर नज़र नहीं आतीं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते तटबंध और कटाव-रोधी प्रोजेक्ट पर काम किया जाए तो इस तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

इस तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने तंज कसा – “नेताओं के बैनर एक जगह लग सकते हैं, लेकिन जनता की समस्या हल करने में सब अलग-अलग हो जाते हैं।”
दूसरे यूज़र ने लिखा – “बैनर हर साल नए आते हैं, लेकिन बाढ़ और कटाव की समस्या हमेशा वही रहती है।”

Ayush Mishra

journalist

Related Posts

7 फरवरी का राशिफल

आज का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर, तो कुछ के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है। जानिए 12 राशियों का विस्तृत राशिफल 👇 ♈ मेष आज आत्मविश्वास…

Read more

Continue reading
7 फरवरी के खास दिन: प्यार की शुरुआत और पत्रकारों को सम्मान

हर साल 7 फरवरी एक खास वजह से याद किया जाता है। यह दिन न सिर्फ प्यार और भावनाओं की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि सच्चाई की आवाज़ बनने वाले…

Read more

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *