समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती: नौसेना के बेड़े में जुड़ा अत्याधुनिक युद्धपोत ‘अंजदीप’

चेन्नई :

भारत की समुद्री सीमाओं की निगरानी और रक्षा क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया नया युद्धपोत ‘अंजदीप’ चेन्नई तट पर औपचारिक रूप से जलावतरण के बाद नौसेना के बेड़े का हिस्सा बन गया। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और शिपयार्ड से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।

 

क्यों खास है यह युद्धपोत

‘अंजदीप’ को खास तौर पर ऐसी तकनीकों से लैस किया गया है जो समुद्र के भीतर छिपी पनडुब्बियों की पहचान करने और तटीय क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी करने में मदद करेंगी। बदलती वैश्विक परिस्थितियों और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए भारत लंबे समय से अपने समुद्री बेड़े को आधुनिक बना रहा है, और इसी रणनीति के तहत इस जहाज़ को तैयार किया गया है।

 

नौसेना अधिकारियों के अनुसार यह पोत आधुनिक सेंसर, संचार प्रणाली और उन्नत रडार तकनीक से युक्त है। इसके जरिए न केवल दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकेगी बल्कि समुद्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर त्वरित प्रतिक्रिया देना भी संभव होगा।

 

बढ़ेगी पनडुब्बी रोधी क्षमता

भारतीय महासागर क्षेत्र में कई देशों की नौसैनिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में समुद्र के नीचे काम करने वाली पनडुब्बियों पर नजर रखना किसी भी नौसेना के लिए सबसे कठिन कार्य माना जाता है।

 

अंजदीप’ को इस चुनौती को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें लगे उपकरण समुद्र के भीतर से आने वाले संकेतों को पकड़कर पनडुब्बियों की मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम बताए जा रहे हैं।

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नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज़ के शामिल होने से तटीय सुरक्षा और समुद्री गश्त दोनों में तेजी आएगी, खासकर उन इलाकों में जहां निगरानी करना पहले कठिन था।

 

चेन्नई में हुआ जलावतरण

चेन्नई बंदरगाह पर आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख ने जहाज़ का जलावतरण किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि देश की समुद्री सीमाएं आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसलिए आधुनिक तकनीक से लैस जहाज़ों का बेड़े में शामिल होना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नौसेना केवल एक जहाज़ तक सीमित नहीं रहने वाली। योजना के अनुसार इसी वर्ष अलग-अलग श्रेणी के लगभग 15 और पोत बेड़े में शामिल किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे आने वाले समय में भारत की समुद्री उपस्थिति और मजबूत होगी।

 

आत्मनिर्भरता की ओर कदम

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे युद्धपोतों का निर्माण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम है। स्थानीय शिपयार्ड और भारतीय इंजीनियरों की भागीदारी से तैयार जहाज़ भविष्य में आयात पर निर्भरता घटाने में मदद करेंगे।

समारोह में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि जहाज़ के कई महत्वपूर्ण हिस्सों का विकास देश के भीतर ही किया गया है, जिससे रखरखाव भी आसान होगा और लागत भी नियंत्रित रहेगी।

 

समुद्र किनारे दिखा उत्साह

जलावतरण के दौरान बंदरगाह के आसपास मौजूद लोगों में भी उत्सुकता देखने को मिली। जैसे ही जहाज़ समुद्र में उतारा गया, वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों ने तालियों से स्वागत किया। कई लोगों ने इसे देश की सुरक्षा के लिए गर्व का क्षण बताया।

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आगे की रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों की रक्षा और मानवीय सहायता अभियानों के लिए मजबूत नौसेना बेहद जरूरी है। ‘अंजदीप’ जैसे जहाज़ भविष्य में राहत और बचाव कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

 

भारतीय नौसेना का लक्ष्य अब सिर्फ तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर समुद्री क्षेत्रों में भी अपनी प्रभावी मौजूदगी बनाए रखना है। नए जहाज़ों के शामिल होने से यह उद्देश्य और आसानी से हासिल किया जा सकेगा।

 

‘अंजदीप’ का नौसेना में शामिल होना केवल एक जहाज़ का बेड़े में आना भर नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण का प्रतीक भी है। आने वाले महीनों में यदि अन्य नियोजित पोत भी शामिल होते हैं, तो भारतीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आएगी।

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