वाशिंगटन, एजेंसी :भारत में सार्वजनिक छुट्टियों की संख्या को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय तुलना के अनुसार, अलग-अलग देशों के सरकारी अवकाशों को देखें तो भारत उन देशों में शामिल है जहाँ लोगों को साल भर में काफी ज्यादा छुट्टियाँ मिलती हैं। यह स्थिति भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और कई धर्मों के त्योहारों की वजह से बनी है।
अलग-अलग त्योहारों का असर
भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन समुदायों के पर्व-त्योहार पूरे साल मनाए जाते हैं। हर राज्य में स्थानीय पर्व भी जोड़े जाते हैं, इसलिए राष्ट्रीय छुट्टियों के साथ-साथ क्षेत्रीय अवकाश भी मिलते हैं। यही कारण है कि यहाँ का छुट्टी कैलेंडर अन्य देशों की तुलना में लंबा दिखाई देता है।
कितनी मिलती हैं छुट्टियाँ
तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार भारत में सालाना लगभग 42 सार्वजनिक अवकाश दर्ज किए गए हैं। यह संख्या कई बड़े देशों से अधिक बताई गई है।
अन्य देशों की स्थिति कुछ इस प्रकार सामने आई:
भारत – लगभग 42 छुट्टियाँ
चीन – करीब 35 छुट्टियाँ
सिंगापुर – लगभग 30 छुट्टियाँ
अमेरिका – करीब 26 छुट्टियाँ
ब्रिटेन – लगभग 25 छुट्टियाँ
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत छुट्टियों के मामले में शीर्ष देशों में गिना जा रहा है।
नए साल की शुरुआत भी खास
दुनिया के अधिकांश देशों में 1 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश रहता है, लेकिन कई देशों में राष्ट्रीय दिवस या स्वतंत्रता दिवस पर भी विशेष छुट्टी दी जाती है। भारत में भी राष्ट्रीय पर्वों — गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती — पर पूरे देश में अवकाश घोषित होता है।
सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ज्यादा छुट्टियाँ सिर्फ आराम का समय नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। अलग-अलग समुदायों के त्योहारों को सरकारी मान्यता मिलने से सामाजिक समरसता और परंपराओं का संरक्षण होता है।
छुट्टियों की अधिक संख्या को लेकर कभी-कभी कामकाज पर असर की चर्चा जरूर होती है, लेकिन यह भी सच है कि यही विविधता भारत की सबसे बड़ी विशेषता है। कई संस्कृतियों और आस्थाओं को सम्मान देने की वजह से भारत दुनिया के उन देशों में गिना जा रहा है जहाँ लोगों को सबसे अधिक सार्वजनिक अवकाश मिलते


















