नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए व्यापक आतंकवाद-रोधी नीति लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, खतरे की पहचान पहले से करना और हमलों को रोकने के लिए तेज कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब सुरक्षा से जुड़े विभाग केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही पहचानने के लिए तकनीक और सूचनाओं का साझा उपयोग करेंगे। नीति का फोकस यह है कि खुफिया जानकारी समय रहते संबंधित एजेंसियों तक पहुंचे ताकि किसी भी हमले को शुरू होने से पहले ही रोका जा सके।
समाज की भागीदारी पर जोर
नई नीति में सिर्फ पुलिस और सुरक्षा बलों पर निर्भर रहने के बजाय आम लोगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। सरकार चाहती है कि नागरिक संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें और समय पर सूचना दें। इससे स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा मजबूत होगी और आतंकियों की गतिविधियों पर जल्दी नजर रखी जा सकेगी।
मुख्य लक्ष्य: हमलों को रोकना, सिर्फ जांच नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नीति का उद्देश्य केवल घटनाओं की जांच करना नहीं बल्कि हमले होने से पहले उन्हें रोकना है। इसके लिए अलग-अलग विभागों की क्षमताओं को एक मंच पर लाया जाएगा, ताकि किसी भी खतरे पर तत्काल और संयुक्त कार्रवाई हो सके।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोग बढ़ाने की योजना है ताकि सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
तीन स्तरों पर सुरक्षा
नीति में बताया गया है कि देश को जमीन, समुद्र और आसमान—तीनों मोर्चों पर खतरे का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस करने की भी योजना बनाई गई है।
आधुनिक तकनीक और नई चुनौतियां
सरकार ने माना है कि आतंकवाद का स्वरूप बदल रहा है। अब सिर्फ हथियारों से ही नहीं बल्कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी खतरे पैदा हो रहे हैं।
डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसलिए साइबर निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग को भी नीति का अहम हिस्सा बनाया गया है।
पुनर्वास और कट्टरता रोकने पर ध्यान
नीति में सिर्फ सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं बल्कि कट्टरपंथ को कम करने के उपाय भी शामिल हैं। जिन लोगों के भटकने की आशंका है, उनके लिए सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास कार्यक्रम चलाने की योजना है ताकि वे मुख्यधारा से जुड़े रहें और चरमपंथी विचारों से दूर रहें।
नई आतंकवाद-रोधी नीति से संकेत मिलता है कि सरकार अब सुरक्षा के मामले में प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि सक्रिय रणनीति अपनाना चाहती है। एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, तकनीक का उपयोग, नागरिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी—इन सभी के जरिए देश की सुरक्षा व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है।

















