नई दिल्ली: केंद्र सरकार की व्यापार नीति से जुड़े एक बड़े फैसले का असर अब सीधे आम यात्रियों की जेब पर दिख सकता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत बड़ी संख्या में विमान, इंजन और उनके कलपुर्जों का आयात करेगा। अनुमान है कि इसकी कुल कीमत लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है।
हवाई किराया क्यों होगा कम?
सरकार का मानना है कि जब एयरलाइंस कंपनियों के पास विमानों की संख्या बढ़ेगी तो उड़ानों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
ज्यादा विमान = ज्यादा उड़ानें
ज्यादा उड़ानें = सीटों की संख्या बढ़ेगी
सीटें बढ़ेंगी = टिकट का दबाव घटेगा
इसी कारण आने वाले समय में हवाई किरायों में कमी देखने को मिल सकती है, जिससे आम लोगों के लिए हवाई यात्रा पहले से अधिक सुलभ होगी।
पर्यटन को मिलेगा बड़ा सहारा
अधिक उड़ानों का सीधा फायदा पर्यटन उद्योग को भी होगा।
. सरकार को उम्मीद है कि:
. विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी
. घरेलू पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा
. नए शहरों और क्षेत्रों तक एयर कनेक्टिविटी पहुंचेगी
. इससे होटल, ट्रैवल, टैक्सी और स्थानीय कारोबार में भी तेजी आएगी।
दूरदराज इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर
नई विमान सेवाओं से केवल बड़े शहर ही नहीं बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों को भी फायदा होगा। बेहतर हवाई संपर्क से:
. यात्रियों का समय बचेगा
. व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी
. क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी
किसानों के हित सुरक्षित
सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है। यानी इस आयात योजना का असर किसानों पर नकारात्मक नहीं पड़ेगा।
अगले पाँच वर्षों की योजना
मंत्री के अनुसार विमानन क्षेत्र में यह आयात आने वाले लगभग पाँच वर्षों में पूरा किया जाएगा। इससे देश की एविएशन क्षमता तेजी से बढ़ेगी और भारत वैश्विक हवाई यातायात के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है।
सरकार की इस पहल से एक साथ कई फायदे होने की उम्मीद है—
. सस्ते हवाई टिकट
. ज्यादा उड़ानें
. पर्यटन में वृद्धि
. दूरदराज इलाकों तक पहुंच
. आर्थिक गतिविधियों में तेजी
यानी आने वाले समय में हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों तक सीमित न रहकर आम लोगों की रोजमर्रा की सुविधा बन सकती है।

















