रिपोर्ट: ब्यूरो, The Newsic
औरंगाबाद (बिहार): बिहार की राजनीति में स्थानीय स्तर पर उठापटक का दौर जारी है। ताजा घटनाक्रम में औरंगाबाद भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला सोशल मीडिया प्रभारी पीयूष पंकज ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पिछले 10 वर्षों से संगठन से जुड़े रहने वाले पीयूष ने न केवल पद छोड़ा है, बल्कि अपनी ही पार्टी की नीतियों के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया है।
विचारधारा और आत्मसम्मान की लड़ाई
पीयूष पंकज ने अपना इस्तीफा जिला अध्यक्ष को संबोधित करते हुए भेजा है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह पार्टी द्वारा वर्तमान में UCC (समान नागरिक संहिता) और SC/ST एक्ट जैसे कानूनों के समर्थन और उन्हें लागू करने की नीति से पूरी तरह असहमत हैं। उन्होंने इन नीतियों को “काले कानून” की संज्ञा दी है।
पत्र में उन्होंने भावुक होते हुए लिखा, “ऐसे निर्णयों के साथ जुड़े रहना मेरे आत्मसम्मान और मेरी विचारधारा के खिलाफ है। मैं पिछले एक दशक से पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रहा था, लेकिन अब नैतिक कारणों से मेरा दम घुट रहा है।”
सामाजिक समानता पर उठाए सवाल
इस्तीफे में पीयूष ने सामाजिक न्याय और समानता पर जोर देते हुए कहा कि वह एक ऐसी व्यवस्था के पक्ष में हैं जो भेदभाव मुक्त हो। उनके अनुसार, यदि किसी नीति से समाज के किसी भी वर्ग को यह महसूस हो कि उसे निशाना बनाया जा रहा है या उसके साथ अन्याय हो रहा है, तो उस पर पुनर्विचार करना आवश्यक है। उनका संकेत स्पष्ट था कि पार्टी की वर्तमान दिशा समाज के कुछ वर्गों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है।
10 साल का सफर और अचानक विदाई
पीयूष पंकज औरंगाबाद में भाजपा के युवा विंग के एक सक्रिय चेहरे माने जाते थे। सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में उन्होंने संगठन की डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। 26 जनवरी 2026 की तारीख वाले इस पत्र ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को चौंका दिया है। एक निष्ठावान कार्यकर्ता का 10 साल बाद इस तरह गंभीर आरोप लगाकर जाना, आगामी चुनावों से पहले संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।
क्या होंगे इसके राजनीतिक मायने?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पीयूष पंकज का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर कुछ नीतियों को लेकर पनप रहे असंतोष का संकेत हो सकता है। औरंगाबाद जैसे क्षेत्र में, जहां जातीय और सामाजिक समीकरण काफी संवेदनशील हैं, वहां UCC और SC/ST एक्ट जैसे मुद्दों पर इस तरह का मुखर विरोध भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
फिलहाल, जिला अध्यक्ष की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पीयूष पंकज ने साफ कर दिया है कि वह अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या यह इस्तीफा औरंगाबाद में किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत है या पार्टी उन्हें मनाने में सफल रहती है।


















