डिनर के बाद टहलना क्यों बन रहा है हेल्थ एक्सपर्ट्स की पहली पसंद?
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में ब्लड शुगर की समस्या सिर्फ़ डायबिटीज़ मरीजों तक सीमित नहीं रही। कई ऐसे लोग भी हैं जो डायबिटीज़ नहीं होने के बावजूद सुबह उठते ही शुगर लेवल बढ़ा हुआ पाते हैं। इसी स्थिति से निपटने में रात के खाने के बाद की हल्की वॉक बेहद कारगर मानी जा रही है।
क्या है डॉन फिनोमेनन?
सुबह के समय शरीर कुछ खास हार्मोन जैसे कॉर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन रिलीज़ करता है। ये हार्मोन शरीर को दिन के लिए तैयार करते हैं, लेकिन साथ ही ब्लड शुगर को भी बढ़ा सकते हैं।
स्वस्थ व्यक्ति में इंसुलिन इस शुगर को संतुलित कर लेता है, लेकिन जिनकी जीवनशैली ठीक नहीं होती, वहां यह संतुलन बिगड़ सकता है।
नॉन-डायबिटिक लोगों के लिए भी चेतावनी?
अगर किसी व्यक्ति का फास्टिंग शुगर कभी-कभी थोड़ा बढ़ा हुआ आता है, तो यह बीमारी नहीं बल्कि एक संकेत हो सकता है। यह इशारा करता है कि भविष्य में डायबिटीज़ से बचने के लिए अभी से आदतों में सुधार ज़रूरी है।
डिनर के बाद 20 मिनट की वॉक क्यों है असरदार?
रात के खाने के बाद हल्की चाल से टहलने से:
मांसपेशियां ग्लूकोज़ का बेहतर इस्तेमाल करती हैं
इंसुलिन की क्षमता बढ़ती है
रातभर शुगर बढ़ने का खतरा कम होता है
पाचन भी बेहतर होता है
यह आदत डायबिटिक और नॉन-डायबिटिक दोनों के लिए फायदेमंद है।
सही समय पर खाना और अच्छी नींद भी ज़रूरी
केवल वॉक ही नहीं, बल्कि:
समय पर भोजन
रात में भारी खाने से बचाव
पर्याप्त नींद
इन सभी का सीधा असर ब्लड शुगर कंट्रोल पर पड़ता है।
डायबिटीज़ हो या न हो, रात के खाने के बाद रोज़ाना 20–30 मिनट की हल्की वॉक अपनाना एक सरल लेकिन बेहद असरदार उपाय है। यह आदत भविष्य की कई गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद कर सकती है।




















